नई दिल्ली, जुलाई 28। चीनी शेयर बाजारों में चल रही उठापटक ने उन भारतीय म्यूचुअल फंड (एमएफ) को प्रभावित किया है, जो चीन और उसके संबंधित क्षेत्रों में निवेश करते हैं। ऐसे एमएफ की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) में तेजी से गिरावट आई है। उदाहरण के लिए इडेलवाइस ग्रेटर चाइना इक्विटी ऑफ-शोर फंड ऑफ फंड (एफओएफ) सोमवार को 4.16 फीसदी नीचे था, जबकि एक्सिस ग्रेटर चाइना इक्विटी एफओएफ का एनएवी मंगलवार को 2.95 फीसदी गिर गया। बता दें कि चीनी कंपनियों के अलावा, ये फंड हांगकांग और ताइवान की फर्मों में निवेश करते हैं। इसलिए इन्हें ग्रेटर चाइना फंड कहा जाता है।
क्यों आई ये गिरावट
हांगकांग एक्सचेंज के बेंचमार्क हैंग सेंग इंडेक्स को ट्रैक करने वाले निप्पॉन इंडिया ईटीएफ हैंग सेंग बीईएस में मंगलवार को 4.19 फीसदी की गिरावट आई। मगर अहम सवाल ये है कि इन फंड्स में गिरावट आई क्यों? चीनी सरकारी एजेंसियों द्वारा टेक्नोलॉजी की बड़ी फर्मों के खिलाफ की गई नियामक कार्रवाइयों में हुई बढ़ोतरी और हाल ही में आफ्टर-स्कूल ट्यूटरिंग कंपनियों में विदेशी पूंजी पर रोक लगाने से चीनी शेयर बाजारों में बिकवाली हुई।
क्या करें निवेशक
मार्केट एक्सपर्ट इस समय चीनी फंड्स को लेकर सतर्कता बरतने को कह रहे हैं। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार फर्स्ट ग्लोबल के वाइस चेयरमैन ने कहा कि चीनी सरकार की नीति साफ दिख रही है और एंट फाइनेंशियल (अलीबाबा एफिलिएट कंपनी) की हालिया स्थिति इस तरफ एक संकेत थी। उन्होंने फरवरी-मार्च, 2021 के बाद से चीन में अपने निवेश में कटौती की है। उन्होंने चीनी फंड्स में निवेश को 12-15 प्रतिशत से घटकर दो प्रतिशत कर दिया है।
दूसरों की राय है अलग
हालांकि एक अन्य फंड मैनेजर के अनुसार नियामक कार्रवाइयों को चीनी सरकार के अपने घरेलू टेक सेक्टर के खिलाफ अभियान के रूप में देखे जाने की जरूरत नहीं है। कुछ साल पहले, चीन ने अपनी केमिकल कंपनियों के खिलाफ प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियामक कार्रवाई की थी। तब उन्हें अपने प्लांट्स को ट्रांसफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सरकारें कुछ क्षेत्रों को नियंत्रित करने के लिए नियामक फैसले ले सकती हैं।
शॉर्ट-टर्म के लिए है दिक्कत
अनुमान ये भी लगाया जा रहा है कि चीन में सामने आ रही मौजूदा कार्रवाई शॉर्ट-टर्म की है। इससे केवल निकट भविष्य में दिक्कत होगी। इस दौरान चीनी सरकार विनियमन के कुछ क्षेत्रों को ठीक करना चाहेगी। बाकी आगे चल कर स्थिति सामान्य हो सकती है। मगर फिलहाल चीनी शेयर बाजार और गिर सकते हैं। क्योंकि चीनी सरकार टेक्नोलॉजी कंपनियों को लेकर सख्त है। इन्हीं कंपनियों का चीन के बेंचमार्क सूचकांकों में काफी अधिक योगदान है।
10-15 फीसदी निवेश रखें बरकरार
जानकारों के अनुसार मौजूदा अस्थिरता के कारण अपना पैसा निकालने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि ऐसा इक्विटी निवेश में होता है। लेकिन अगर आपने चीन में खास निवेश करते है, तो ध्यान रहे कि यह अंतरराष्ट्रीय इक्विटी के आपके कुल एक्सपोजर का एक निश्चित हिस्सा हो। कुल मिलाकर आप अपने पैसे का 10-15 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय इक्विटी में निवेश कर सकते हैं।


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