Mid Cap Funds : निवेशक आज के समय में अधिक रिटर्न पाने के लिए मिड कैप फंडों में तेजी से निवेश कर रहे हैं और समय के साथ ये पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल जनवरी से मिड कैप फंडों में शुद्ध निवेश (इंफ्लो) 16,025 करोड़ रुपये है, जबकि लार्ज-कैप फंडों में यह 14,565 करोड़ रुपये रहा। यानी निवेशकों का ध्यान लार्ज कैप से अधिक मिड कैप फंड्स पर रहा। मगर मिड कैप फंड्स में थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है।

कितना दिया रिटर्न
मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंडों ने पिछले तीन वर्षों में 22 फीसदी से 30 फीसदी की रेंज में वार्षिक रिटर्न दिया है और मजबूत प्रदर्शन किया है। इन्होंने लार्ज कैप फंडों को एक अच्छे मार्जिन से पीछे छोड़ा है। जानकारों का कहना है कि ज्यादातर इक्विटी डायवर्सिफाइड फंड लार्ज कैप ओरिएंटेड होते हैं, यानी वे लार्ज पर अधिक फोकस करते हैं। इसलिए मिड कैप फंड्स में एलोकेशन करना उपयोगी हो सकता है।
मिड कैप सेगमेंट की कंपनियां
बीते कुछ समय में मिड कैप सेगमेंट में कई कंपनियां की क्षमता कुछ लार्ज-कैप कंपनियों की तुलना में बेहतर दर से बढ़ने की रही है। इसलिए मिड कैप फंडों में आवंटन बेहतर रिटर्न पाने में मददगार हो सकता है।

वैल्यूएशन की भूमिका
जहां निवेशक इन रिटर्न से उत्साहित हैं और इन कैटेगरियों (स्मॉल और मि़ड) में निवेश कर रहे हैं, वहीं जानकारों का कहना है कि निवेशकों को इनमें सावधान भी रहने की जरूरत है। असल में वैल्यूएशन रिटर्न बढ़ाने के साथ-साथ निवेश में जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ये रहता है जोखिम
हाई वैल्यूएशन पर निवेश, आम तौर पर मजबूत प्रदर्शन की अवधि के बाद आता है, जिसके नतीजे में भविष्य में कम रिटर्न और गिरावट या नकारात्मक रिटर्न का जोखिम रहता है। मिड-कैप फंडों में निवेश करते समय, वैल्यूएशन के अलावा, आपको विभिन्न मार्केट साइकिलों में फंडों के लॉन्ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए। मिड-कैप का प्रदर्शन अधिक अस्थिर हो सकता है, इसलिए सलाह दी जाती है कि किसी एक फंड पर ध्यान देने के बजाय कम से कम दो से तीन मिड-कैप फंडों में निवेश करें।

इन बातों का रखें ध्यान
मिड-कैप स्टॉक काफी अस्थिर होते हैं, मगर ये स्मॉल-कैप शेयरों की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं। मिड-कैप फंड में कुछ फंड अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा लार्ज-कैप कंपनियों में निवेश करते हैं। इससे फंड को गिरते बाजार में कम अस्थिरता का सामना रहता है, जो कि अच्छा है। मगर मिड-कैप फंडों में अधिकांश निवेश मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में ही निवेश किया जाएगा और इसीलिए ये फंड अधिक अस्थिर हो सकते हैं। भू-राजनीति तनाव, मुद्रास्फीति, बढ़ती मुद्रास्फीति, विश्व स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों, केंद्रीय बैंकों द्वारा लिक्विडिटी विदड्रॉल और ऐसे ही कुछ फैक्टरों से बाजार इस समय अस्थिर है। इन सबके बीच, भारतीय इक्विटी ने साल-दर-साल आधार पर वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया है। यानी आप मिड कैप फंड में निवेश कर सकते हैं। मगर केवल तब ही जब आप लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करें और थोड़ा जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं।
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