
Mutual Fund : निवेशक जब म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते है। तब अक्सर निवेश करने से पहले रेटिंग पर ध्यान देते है। माना जाता है कि रेटिंग जितनी बेहतर होती है। फंड में उतना ही लाभ मिलता है। क्या आप जानते है कि म्यूचुअल फंड की रेटिंग कैसे तय होती है। रेटिंग के क्या मतलब होते है। क्या सिर्फ जो स्टार रेटिंग होती है। इस रेटिंग से बेहतर रिटर्न की गारंटी मिल जाती है। आइए जानते हैं इसके बारे में।
1 से 5 के बीज म्यूचुअल फंड को रेटिंग दी जाती है
फिरोज अजीज जो आनंद राठी वेल्थ के डिप्टी सीईओ है।इन्होंने कहा कि जो रेटिंग होती है। यह स्टार रेटिंग फंड को दी जाने वाली रेटिंग होती है। 1 से 5 के बीज म्यूचुअल फंड को रेटिंग दी जाती है। अलग अलग कंपनी की जो रेटिंग होती है। यह रेटिंग अलग-अलग होती है। बता दें यह रेटिंग जोखिम मैनेजमेंट और परफॉर्मेंस पर आधारित होती है।
रेटिंग किस तरह तय होती है
अगर हम बात करें कि म्यूचुअल फंड में रेटिंग को कैसे तय होती है, तो म्यूचुअल फंड की रेटिंग जोखिम मैनेजमेंट और फंड की परफॉर्मेंस के आधार पर तय होती है। म्यूचुअल फंड का 1 साल, 3 साल और 5 साल का ट्रैक देखा जाता है। इसके बाद रेटिंग दी जाती है। फंड रेटिंग हर माह होता है। हर वेबसाइट की फंड की अपनी रेटिंग होती है।
कैसे तय होती है म्यूचुअल फंड की रेटिंग
जिस म्यूचुअल फंड को 5 स्टार रेटिंग मिलती है यानी वह वेरी हाइली रेटेड फंड है। वही, जिसको 4 रेटिंग मिलती है। वह फंड वेरी हाइली रेटेड फंड में आते है। जब 3 स्टार रेटिंग वाले जो म्यूचुअल फंड होते है। यह मॉडरेटली रेटेड फंड में आते है। वही, 2 स्टार रेटिंग वाले फंड लो रेटेड फंड माने जाते है और 1 स्टार रेटिंग वाले एमएफ वेरी लो रेटेड फंड माने जाते है।
निवेश कितना सही रेटिंग के हिसाब से
इस पर फिरोज अजीज ने कहा है कि आज का जो स्टार रेटिंग फंड है। यह जरूरी नहीं है। की वह कल भी आपको बेहतर रिटर्न दे। आपको स्टार रेटिंग को देखकर म्यूचुअल फंड को सिलेक्ट नही करना चाहिए। जो फंड में आपको निवेश का सोच रहे है। फंड की अपने बेंचमार्क से तुलना भी आवश्यक होती है। आप जब भी निवेश के लिए बेहतर म्यूचुअल फंड की तलाश करते है। उस समय आप स्कीम के सेक्टर एलोकेशन पर ध्यान दें।


Click it and Unblock the Notifications