Mutual Fund Monthly Income Plan : क्या आप निवेश करते हैं? अगर हां तो अच्छी बात है, मगर यदि नहीं करते तो जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए। इसका एक कारण है रिटायरमेंट के बाद की तैयारी। रिटायरमेंट के बाद की तैयारी के लिए निवेश करना बहुत अहम है, क्योंकि उस समय आपके पास किसी तरह की रेगुलर इनकम नहीं होगी। मगर म्यूचुअल फंड ऐसा तरीका आपको पेश करेगा, जिससे आप रिटायरमेंट के बाद के लिए रेगुलर इनकम का इंतजाम कर सकते हैं।

मंथली इनकम स्कीम
अकसर लोग निवेश से अपनी आमदनी बढ़ाने पर ध्यान देते हैं, जो कि जरूरी भी है। वे कम रिस्क वाले निवेश की तलाश करते हैं। कम जोखिम वाला निवेश ऑप्शन उनके लिए बेहतर हो सकता है। बाकी रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम पाने के लिए म्यूचुअल फंड की मंथली इनकम स्कीम बेस्ट हो सकती है। इसमें कम जोखिम है और ज्यादा रिटर्न मिल सकता है।
ओपन एंडेड फंड
म्यूचुअल फंड की स्कीम ओपन एंडेड फंड होते हैं। इसमें निवेशकों का बड़ा हिस्सा डेब्ट इंस्ट्रमेंट्स में निवेश किया जाता है, जो कि इसे कम जोखिम वाला निवेश ऑप्शन बनाता है। अच्छी बात यह है कि इस विकल्प में कम जोखिम है, मगर इसके बावजूद यहां आप पोस्ट ऑफिस, एफडी या आरडी से अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं। ये इसका बड़ा बेनेफिट है।

कंजर्वेटिव हाईब्रिड फंड
मंथली इनकम प्लान को कंजर्वेटिव हाईब्रिड फंड भी कहा जाता है। जैसा कि हमने बताया कि मंथली इनकम प्लान में अधिकतर पैसा डेब्ट ऑप्शनों में जाता है और थोड़ा हिस्सा इक्विटी में जाता है। इससे यह उन लोगों के लिए बेस्ट है, जो ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते। जहां तक फंड की बात है तो करीब 75 से 90 फीसदी पैसा डेब्ट में जाता है। बाकी 10 से 25 फीसदी पैसा इक्विटी में निवेश किया जाता है। जब डेब्ट का हिस्सा अधिक होगा तो जोखिम कम होगा।
कैसे मिलती है रेगुलर इनकम
निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि आम तौर पर वो इनकम निवेशकों में बांटी जाती है, जिसे फंड ने किसी भी वितरण योग्य सरप्लस को जनरेट किया हो। दूसरी बात कि इन फंडों में कुछ इक्विटी एक्सपोजर होता ही है। इसलिए जनरेट होने वाला रिटर्न शुद्ध डेब्ट फंड्स की तुलना में अधिक हो सकता है। डिविडेंड का भुगतान फंड के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और इसकी गारंटी नहीं होती है।

क्या है जानकारों की राय
जानकारों का कहना है कि निवेशकों के लिए बेहतर यह है कि वे ग्रोथ ऑप्शन को चुनें और जरूरत के हिसाब से सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान बनाएं। यह अधिक फ्लेक्सिबल होता है। इसमें भुगतान निवेशक की जरूरतों के अनुसार होता है। यह उन जगहों पर भी काम कर सकता है जहां कुछ समय के लिए पेआउट की जरूरत होती है और बाद में फिर से शुरू किया जाता है। यानी अभी जरूरत है तो पैसे ले लिए, फिर ये पेमेंट रोक दी और आगे चल कर फिर से शुरू कर लिया। ये भी ध्यान रखें कि इक्विटी और डेट के बीच एसेट एलोकेशन फंड की टैक्सेबिलिटी तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
More From GoodReturns

Silver Price Today: 8 मार्च को चांदी खरीदने का प्लान है? जानें आज 1 किलो चांदी का भाव क्या है?

Gold Rate Today: 6 मार्च को सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Silver Price Today: शनिवार को बाजार में हड़कंप! फिर चांदी के दाम धड़ाम, जानें 1 किलो चांदी का रेट क्या है?

PNB का बड़ा फैसला! 13 डेबिट कार्ड से ATM कैश निकासी सीमा आधी, जानें किन कार्डधारकों पर पड़ेगा असर

Ladli Behna Yojana 34th Installment: 1500 या 3000 रुपये? जानें कब आएगी 34वीं किस्त और ऐसे करें स्टेटस चेक

Gold Rate Today: सराफा बाजार में सोने के दामों में लगातार कमी, जानें आज कितना सस्ता हुआ 22K और 24K गोल्ड

CM Kisan Samman Yojana: राजस्थान किसानों के लिए अपडेट! कब आएगी 6वीं किस्त, ऐसे चेक करें पेमेंट स्टेटस

Silver Price Today: 6 मार्च को भी चांदी में उतार-चढ़ाव! 30,100 रुपये टूटा भाव, जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Gold Rate Today: होली पर सस्ता हुआ सोना-चांदी का भाव, जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Gold Rate Today: 10 मार्च को कई दिनों बाद सोने की कीमतों में फिर आई तेजी, जानिए 24k, 22k 18k गोल्ड रेट

Gold Price Today: मिडिल ईस्ट जंग के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट



Click it and Unblock the Notifications