सरसों के तेल ने निकाला दम, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमत, जानिए एक लीटर का दाम

नई दिल्ली, जून 8। पिछले कुछ समय में सरसों के तेल की कीमतों में काफी अधिक बढ़ोतरी देखी गयी है। देश की कई मंडियों में सरसों के दाम बढ़े, जिससे सरसों का तेल भी महंगा हो गया। बता दें कि बीते एक महीने में ही सरसों के तेल की कीमतों में 60 रु की बढ़ोतरी हुई, जिससे इसका दाम 180 रु से बढ़ कर प्रति लीटर 240 रु हो गय। वहीं बात पिछले साल की करें तो यह 140 रु प्रति लीटर के रेट पर बिक रहा था। सरसों के तेल की कीमतों में इतनी बढ़ोतरी आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों के लिए भी मुसीबत है।

कितना है उत्पादन

कितना है उत्पादन

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते वित्त विर्ष (2020-21) में 99.9 लाख टन सरसों का उत्पादन होने की संभावना है, जो कि अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड उत्पादन है। इससे पिछले वित्त वर्ष में सरसों का उत्पादन 91.2 लाख टन रहा था। वहीं 2015-16 से 2019-20 तक देखें तो सरसों का औसत उत्पादन 83 लाख टन रहा। रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद सरसों के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कुछ और ही कारण हैं।

ये हैं तीन कारण

ये हैं तीन कारण

सरसों के तेल की कीमतों में इतनी तेजी के तीन अहम कारण बताए जा रहे हैं। पहला कि अब खाद्य तेलों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिहाज से तय की जा रही हैं। इससे सरसों के तेल के दाम बढ़े हैं। वहीं कोरोना संकट में लोग रिफाइंड के बजाय सरसों के तेल का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। क्योंकि इसे ज्यादा हेल्थी माना जा रहा है। इसके अलावा अब सरसों के तेल में मिलावट नहीं हो सकेगी। इसके लिए नये नियम लागू हो गये हैं।

कैसे तय होते हैं दाम

कैसे तय होते हैं दाम

करीब 100 किलो सरसों, जिसका रेट इस समय 7500 रु है, से 36 लीटर तेल मिलता है। इस आधार पर सरसों के शुद्ध तेल का रेट ही 208 रु प्रति लीटर हो जाएगा। फिर कारोबारी अपना मुनाफा जोड़ते हैं। इस तरह आपके किचन तक सरसों के तेल का रेट 240 रु तक पहुंचेगा।

किसानों का बदला रुझान

किसानों का बदला रुझान

जानकार बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों के किसानों का ध्यान सरसों के बजाय गेहूं पर चला गया है। इससे ऐसे क्षेत्रों में सरसों के तेल की कीमतें बढ़ी हैं। संभावना है कि मौजूदा रेट को देखते हुए किसान फिर से सरसों की तरफ ध्यान दे सकते हैं।

सरकार का टार्गेट उत्पादन बढ़ाना

सरकार का टार्गेट उत्पादन बढ़ाना

सरकार ने राष्ट्रीय तिलहन मिशन शुरू किया है। इस मिशन का टार्गेट खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना है। सरकार का लक्ष्य सालाना 1.4 करोड़ टन सरसों का उत्पादन करना है।

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