नई दिल्ली, सितंबर 15। अकसर कंपनियों को कर्ज की जरूरत पड़ती रहती है। वे जरूरत के समय कर्ज बैंक या कैपिटल मार्केट (बॉन्ड या डिबेंचर जारी करके) जुटा लेती हैं। कंपनियां अपने लोन की रीफाइनेंस करने या अपना विस्तार करने के लिए लोन लेती हैं। इसी तरह अब रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिसके चेयरमैन मुकेश अंबानी हैं, की सब्सिडरी कंपनी रिलायंस रिटेल को 1 लाख करोड़ रु की जरूरत है। आगे जानिए क्या है पूरा मामला।
बढ़ाना चाहती है उधार लिमिट
हर कंपनी की एक उधार लिमिट होती है। उसे बढ़ाने के लिए कंपनी को शेयरधारकों की मंजूरी चाहिए होती है। रिलायंस रिटेल की मौजूदा उधार सीमा 50,000 करोड़ रुपये है। इसे यह बढ़ा कर एक लाख करोड़ रुपये करना चाहती है। इसके लिए कंपनी को शेयरधारक की मंजूरी चाहिए। रिलायंस रिटेल भविष्य के डेवलपमेंट और विस्तार के लिए अपनी उधार लिमिट बढ़ाना चाहती है।
कितना है कंपनी पर कर्ज
31 मार्च, 2022 तक कंपनी पर 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। उधार सीमा में वृद्धि के बाद रिलायंस रिटेल को 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने में मदद मिलेगी। रिलायंस रिटेल की लेटेस्ट वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी 30 सितंबर को अपनी आगामी वार्षिक आम बैठक में शेयरधारक की मंजूरी लेगी ताकि मौजूदा 50,000 करोड़ रुपये की सीमा को कंपनी के व्यवसाय के उद्देश्य के लिए बढ़ाया जा सके।
विस्तार में तेजी
रिलायंस रिटेल छोटे बाजारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए सालाना 2,000 से अधिक ईंट-और-मोर्टार स्टोर (रिटेल स्टोर) खोलने की योजना के साथ अपने विस्तार में तेजी ला रही है। साथ ही, रिलायंस जियोमार्ट, अजियो रिलायंस डिजिटल और थर्ड पार्टी के विक्रेताओं को समर्पित एक नये प्लेटफॉर्म के साथ ई-कॉमर्स बाजार का एक बड़ा हिस्सा चाहती है। अंबानी परिवार ने भी हाल ही में एफएमसीजी कारोबार में कदम रखने की योजना की भी घोषणा की।
30 हजार करोड़ रु का निवेश
रिलायंस रिटेल ने अधिग्रहण (कंपनियों की खरीदारी) और रणनीतिक साझेदारी पर अपनी स्टोर उपस्थिति का विस्तार करने के लिए 2021-22 में 30,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था। रिलायंस रिटेल की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि 31 मार्च, 2022 तक उस पर 40,756.44 करोड़ रुपये का लोन था, जिसमें से 12,021 करोड़ रुपये लंबी अवधि का लोन और 28,735.44 करोड़ रुपये का शॉर्ट टर्म लोन है। शॉर्ट टर्म लोन में से 28,733.7 करोड़ रुपये संबंधित पक्षों से अनसिक्योर्ड लोन और एडवांसेंज हैं।
कर सकती है लोन को रीफाइनेंस
रिलायंस रिटेल की तत्काल होल्डिंग कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सहायक (सब्सिडरी) कंपनी है। जानकार मानते हैं कि यह देखते हुए कि मौजूदा लोन का बड़ा हिस्सा शॉर्म टर्म वाला है जिसे एक वर्ष के भीतर चुकाने की आवश्यकता है, यह संभव है कि रिलायंस रिटेल कैश फ्लो को कम करने के लिए शॉर्ट टर्म लोन्स को रीफाइनेंस करना चाहती हो। उधार लिमिट में पर्याप्त वृद्धि से पता चलता है कि कंपनी विस्तार और परिचालन खर्चों के लिए और अधिक उधार लेने पर विचार कर रही है। एक साल पहले, रिलायंस रिटेल ने 50,000 करोड़ रुपये की उधार सीमा के लिए शेयरधारक की मंजूरी ली थी। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 में रिलायंस रिटेल की उधारी 14,745.88 करोड़ रुपये थी जो पूरी तरह से शॉर्ट टर्म लोन था।
More From GoodReturns

399 रुपये से कम में बेस्ट OTT प्लान: Jio, Airtel और Vi में से कौन सा है पैसा वसूल?

Vi का 859 रुपये वाला धांसू प्लान: 180 दिनों की वैलिडिटी और अनलिमिटेड डेटा, क्या आपको मिला यह ऑफर?

LIC की नई पॉलिसी लॉन्च: 'बीमा प्लेटिनम' और 'जीवन रक्षा' में से कौन सी है आपके लिए बेस्ट?

पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी: आज आपके शहर में क्या है कीमत? जानें पूरा गणित

IMD अलर्ट: भारी बारिश में गाड़ी-घर का नुकसान? क्लेम पाने का आसान तरीका

9 सितंबर को सोने के दाम: क्या आज खरीदारी का सही मौका है? जानें ताजा भाव

Gold and Silver Price Today: 7 सितंबर को सोने-चांदी के भाव क्या आज खरीदारी का सही मौका है? जानें ताजा रेट

आज 8 सितंबर को सोने के भाव में आई नरमी, क्या खरीदारी का है सही मौका? जानें 22 और 24 कैरेट के ताजा रेट

NSE प्री-ओपन ऑक्शन में बड़ा बदलाव: 7 सितंबर से बदलेंगे नियम, जानें निवेशकों पर क्या होगा असर?

रविवार को सोने-चांदी के भाव स्थिर: क्या आज खरीदारी करना है सही फैसला? जानें 22K-24K के ताजा रेट्स

मुंबई लोकल मेगाब्लॉक: आज वेस्टर्न और सेंट्रल लाइन पर बड़ा असर, घर से निकलने से पहले देखें टाइमिंग



Click it and Unblock the Notifications
