नई दिल्ली, जुलाई 02। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बैल्यूएबल कंपनी है। रिलायंस का व्यापार एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है, कंपनी पेट्रोलियम, टेलीकॉम और रिटेल का बिजनेस प्रमुख रूप से करती है। लेकिन यह बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि रिलायंस दुनिया में आम के प्रमुख निर्यातकों में से एक है। गुजरात के जामनगर में रिलायंस की केवल रिफाइनरी हीं नहीं है बल्कि एक 600 एकड़ का आम का बगीचा भी है। बगीचे में डेढ़ लाख से भी अधिक आम के पेड़ हैं। आम के इस बाग में देसी किस्म के आमों के आलावा 200 पेड़ विदेशी किस्म के भी हैं। चलिए आज आप को बताते है कि आखिर आम के व्यापार में रिलायंस आई कैसे।
कैसे आया बगीचा लगाने का आइडिया
रिलायंस का आम के बिजनेस में उतरना एक इत्तेफाक है। जामनगर में रिलायंस की बहुत बड़ी रिफायनरी है, इसे दुनिया के सबसे बड़ी रिफाइनरी में गिना जाता है। दरअसल, भारतीय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से रिफाइनरी से होने वाले प्रदूषण पर कंट्रोल करने के नोटिस दिए जा रहे थे। रिलायंस ने प्रदूषण कम करने और रिफाइनरी से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए आम का बगीचा लगाया था। रिलायंस ने पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नोटिस के बाद साल 1997 में आम का बगीचा बनाया था। रिलायंस ने रिफाइनरी के पास हीं बंजर पड़ी जमीन पर तकनिकी का इस्तेमाल कर आम के पेड़ उगाए थे। बाग का नाम कंपनी के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के नाम पर 'धीरूभाई अंबानी लखीबाग आमराई' रखा गया है।
तकनीक का प्रयोग होता है
धीरूभाई अंबानी लखीबाग आमराई 600 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला है, इस बाग को दुनिया का सबसे बड़ा आम का बगीचा माना जाता है। बगीचा बंजर जमीन पर है तो पानी की समस्या रहती है लेकिन रिफाइनरी के डिसैलिनेशन प्लांट में समुद्र के पानी को रिफाइंड करके बाग में पानी पहुंचाया जाता है। बगीचे में पानी की प्रॉब्लम से निपटने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग और ड्रिप इरिगेशन तकनीकी का इस्तेमाल होता है। धीरूभाई अंबानी अमराई में केसर, अल्फोंसो, रत्ना, सिंधु, नीलम और आम्रपाली जैसी तमाम देसी किस्म के पेड़ है। देसी नस्लों के आलावा विदेशी किस्म के आम के पेड़ भी हैं। बाग में इजराइल, अमेरिका, जर्मनी के आम के नस्लों के पेड़ लगाए गए है।
विदेशों में होता है निर्यात
बगीचे में लगने वाले आम का निर्यात विश्व भर में बड़े पैमाने पर किया जाता है। आम के बागान की कमान मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी संभालती हैं। बगीचे में केवल आम के ही पौधे नहीं है बल्कि अमरूद, इमली, काजू, ब्राजीलियन चेरी, चीकू, आड़ू, अनार और कुछ औषधीय पेड़ भी हैं। बगीचे से आम की पैदावार 10 मीट्रिक टन से भी अधिक की है। रिलायंस हर वर्ष आस-पास के किसानों को आम के बगीचे से जुड़ी जानकारियों की ट्रेनिंग देता है और हर वर्ष सैकड़ों आम के पौधों का वितरण भी करता हैं। विश्व बाजार में रिलायंस आमों का व्यापार 'रिल मैंगो' ब्रांड के नाम से करता है।
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