विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंकीपॉक्स वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब मामले डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से बाहर पड़ोसी देशों में भी फैल रहे हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है. एमपॉक्स, जिसे पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता है. नजदीक रहने से से फैलता है. मंकीपॉक्स वायरस के लक्षणों में फ्लू जैसा दर्द और मवाद से भरे घाव शामिल हैं.
WHO का हाइएस्ट लेवल अलर्ट, अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) जाना जाता है. बीमारी को रोकने के लिए इंटरनेशनल रिसर्च, फंडिंग और सहकारी उपायों को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है.
मंकीपॉक्स के क्या है लक्षण?
मंकीपॉक्स 5 से 21 दिनों तक हो सकती है. इस बीमारी का गंभीर फेज आमतौर पर 1 से 3 दिनों तक होता है. इस दौरान रोगी को बुखार, तेज सिरदर्द, लिम्फ नोड्स की सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द और ऊर्जा की कमी महसूस होती है. बीमारी के अगले चरण में स्कीन पर दाने निकलना है जो 2 से 4 हफ्ते तक रहता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुकाबिक इस वायरस में मौत की दर 0 से 11% के बीच रही है. जबकि छोटे बच्चों में मृत्यु की दर ज्यादा रही है.
नए वैरिएंट ने बढ़ाई टेंशन
इस साल अफ्रीका में 14,000 से ज़्यादा एमपॉक्स मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इसमें 524 मौतें दर्ज की गई हैं, जो पिछले साल के आंकड़ों से ज्यादा है. इनमें से 96% मामले और मौतें कांगो में हुई हैं, जहां एक नया वैरिएंट सामने आया है. यह वैरिएंट सेक्सुअल एक्टिविटी समेत रेगुलेर कॉन्टैक्ट के जरिए ज्यादा संक्रामक होता है. साथ ही इसमें बीमारी के लक्षण भी कम ही नजर आते हैं.
मौजूदा प्रकोप क्लेड IB की वजह है, जो एक नया और ज्यादा संक्रामक वैरिएंट है. यह लोकल क्लेड I से भी ज्यादा तेजी से फैल रहा है. इसने न केवल कांगो बल्कि बुरुंडी, केन्या, रवांडा और युगांडा को भी प्रभावित किया है. WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी की आपातकालीन समिति की एक अहम मीटिंग के बाद इमरजेंसी का ऐलान किया है.
अफ्रीकी देशों पर प्रभाव ज्यादा
अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) ने इस हफ्ते की शुरुआत में ही क्षेत्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी थी. अफ्रीका CDC के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया ने बढ़ते संकट से निपटने के लिए ग्लोबल पार्टनर्स से तत्काल सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया.

मंकीपॉक्स वायरस का लंबा है इतिहास
एमपॉक्स यानी मंकीपॉक्स की पहचान सबसे पहले 1958 में बंदरों में प्रकोप के माध्यम से हुई थी, लेकिन 2022 में सेक्सुअल कॉन्टैक्ट से फैलना शुरू हुआ. इसने 70 से ज्यादा देशों में वैश्विक प्रकोप को जन्म दिया. इसमें बुखार और शरीर में दर्द जैसे हल्के लक्षणों से जुड़े गंभीर मामलों में चेहरे, हाथों और जननांगों पर घाव हो सकते हैं.
कांगो के एक माइनिंग सिटी में पाया गया नया वैरिएंट गंभीर खतरा पैदा करता है. क्योंकि इससे संक्रमित लोगों में से 10% तक की मौत हो सकती है. पहले के प्रकोपों के विपरीत जहां घाव मुख्य रूप से छाती और अंगों पर दिखाई देते थे, यह वैरिएंट जननांगों में घाव पैदा करता है, जिससे शुरुआती पहचान और रोकथाम के प्रयास मुश्किल हो जाते हैं.
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