MPC Minutes : खुदरा महंगाई दर जुलाई में 15 महीने हाई पर है तो खाद्य महंगाई दर वर्ष 2020 के बाद सबसे हाई स्तर 11.51 प्रतिशत पर जा पहुंची है। जुलाई-अगस्त महीने में साग सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की चिंता बढ़ा दी है।
केंद्रीय बैंक के गर्वनर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने अल नीनो और असमान बारिश से पैदा हुए चुनौती पर कड़ी नजर बनाये रखने की वकालत की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 8 अगस्त से 10 अगस्त 2023 को आरबीआई एमपीसी की जो बैठक हुई थी। उसके मिनट्स जारी किए गए हैं उसी से ये बातें निकलकर सामने आई है।

केंद्रीय बैंक की एमपीसी बैठक में कमिटी के सभी सदस्यों ने 6.50 प्रतिशत रेपो रेट में कोई चेंज नहीं करने पर अपनी सहमति व्यक्त की थी। केंद्रीय बैंक के गवर्नर अपने बयान में कहा कि ग्लोबल स्ट्रेस का रिस्क बना हुआ है इसके साथ ही असमान मौसम का असर कृषि उपज पर पड़ सकता है।
गवर्नर की तरफ से कहा गया है कि इंटरनेशनल मार्केट में कमोडिटी की प्राइस में उछाल और सप्लाई में व्यवधान से एनर्जी प्राइसेज में उछाल का रिस्क बना हुआ है। जिससे घरेलू कीमतों में स्थिरता को चुनौती मिल सकती है।
एमपीसी की सदस्य आशिमा गोयल की तरफ से कहा गया है कि मानसून ने जुलाई महीने में रफ्तार पकड़ी लेकिन असमान बारिश के वजह से सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। जून महीने में हेडलाइन इंफ्लेशन में इजाफा हुआ है जबकि कोर इंफ्लेशन कम रहा है। आशिमा गोयल ने कहा कि खाने-पीने की चीजों की प्राइस में उतार-चढ़ाव और कोर इंफ्लेशन पर कड़ी नजर बनाये रखने की आवश्कता है।
एमपीसी के दूसरे सदस्य जयंत वर्मा की तरफ से कहा गया है कि इनफ्लेशन पर जीत की घोषणा करने को लेकर मैंने आगाह किया किया था। अब ये स्पष्ट है कि आगामी कुछ महीनों तक महंगाई टोलरेंस बैंड के ऊपर बनी रहेगी।
एमपीसी के एक अन्य सदस्य राजीव रंजन की तरफ से कहा गया है कि जून-जुलाई महीने में सब्जियों की कीमतें बढ़ी हैं। जो सीजनल ट्रेंड से अधिक है और इसमें हाल के वर्षों में काफी तेज उछाल देखने को मिला है।
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राजीव रंजन ने कहा कि टमाटर की कीमतें करीब 326 प्रतिशत बढ़ गई। उन्होंने कहा कि खरीफ फसलों की बुआई बढ़ी है लेकिन सब्जियों के साथ ही दाल, अनाज और मसालों की कीमतों में चिंता परेशानी की वजह बना हुआ है और इस पर निगरानी रखने की आवश्यकता है।
राजीव रंजन ने कहा कि आगामी 2 महीनों तक असमान बारिश और अल नीनो का असर, ग्लोबल फूड कीमतों में उतार चढ़ाव के चलते घरेलू खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता को लेकर आउटलुक ढुल मुल बना हुआ है।
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