मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने सरकारी नौकरी से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड और वोटर आईडी को जन्मतिथि का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता। अदालत के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि पहचान से जुड़े दस्तावेज और सर्विस रिकॉर्ड एक जैसे नहीं होते और दोनों की भूमिका अलग-अलग होती है।

आंगनवाड़ी सहायिका के पद से जुड़ा विवाद
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला धार जिले के जामली (अंबापुरा) आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़ा है। यहां पहले हिरलीबाई सहायिका के तौर पर कार्यरत थीं। विभाग के रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि दर्ज थी और उसी के आधार पर तय उम्र पूरी होने पर वर्ष 2017 में उन्हें रिटायर कर दिया गया। उस समय उन्होंने इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
रिटायरमेंट के बाद पद खाली हुआ और महिला एवं बाल विकास विभाग ने नियमों के अनुसार नया चयन किया। चयन प्रक्रिया में प्रमिला का चयन हुआ और वह 2018 से लगातार काम कर रही थीं।
अचानक बदला फैसला
करीब दो साल बाद हिरलीबाई ने दावा किया कि उनकी जन्मतिथि गलत दर्ज है और वह अभी रिटायर होने की उम्र में नहीं थीं। उन्होंने आधार कार्ड और वोटर आईडी में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर दोबारा नौकरी की मांग की। जिला स्तर पर उनकी अपील मान ली गई, जिसके बाद उन्हें फिर से बहाल कर दिया गया और प्रमिला को नौकरी से हटा दिया गया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस मामले में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो कर्मचारी लंबे समय तक सेवा रिकॉर्ड को स्वीकार करता है और रिटायरमेंट भी मान लेता है, वह बाद में पहचान पत्रों के आधार पर जन्मतिथि नहीं बदल सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार और वोटर आईडी में दर्ज तारीखें कई बार अनुमान पर आधारित होती हैं, इसलिए इन्हें सेवा से जुड़े मामलों में अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
प्रमिला को न्याय
अदालत ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के आदेशों को रद्द करते हुए प्रमिला को दोबारा उसी पद पर बहाल करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि उन्हें सेवा की निरंतरता, वरिष्ठता और आर्थिक लाभ दिए जाएं। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि हिरलीबाई को रिटायरमेंट के बाद जो वेतन मिला है, वह ब्याज सहित वापस लिया जाए।
फैसले का असर
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है जो नियमों के तहत चुने जाते हैं और बाद में प्रशासनिक फैसलों के कारण परेशान होते हैं। साथ ही यह निर्णय साफ करता है कि सरकारी नौकरी में जन्मतिथि तय करने के लिए केवल आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड ही मान्य होंगे, न कि पहचान से जुड़े सामान्य दस्तावेज।
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