EU-India FTA Deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा 27 जनवरी को होने वाली है। इस डील का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बाजारों तक पहुंच को आसान बनाना है। इसके तहत, यूरोपीय संघ की वस्तुओं को भारत में कम या बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिल पाएगा, जबकि भारतीय उत्पाद भी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में इसी तरह के लाभ के साथ बेचे जा सकेंगे।

यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्विट्जरलैंड के दावोस में बीते मंगलवार को यह बात कही थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोपीय यूनियन भारत के साथ एक ऐसी डील करने जा रहा है, जो आज तक किसी भी देश ने नहीं की है। उनके अनुसार, यह समझौता 27 देशों के यूरोपीय समूह को 'फर्स्ट मूवर एडवांटेज' देगा। इसी क्रम में, भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी आगामी भारत-ईयू व्यापार समझौते को 'सभी डीलों की जननी' बताया है।
तो आइए जानते हैं भारत को इस डील से क्या-क्या बड़े लाभ मिलने की संभावना है। कौन से 5 बड़े फायदे भारत को इस डील से होने की उम्मीद है...
भारत को होने वाले 5 बड़े फायदे
1. निर्यात में तेजी: यूरोपीय संघ विश्व का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक है, और इस समझौते के बाद भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कमी आएगी या वे पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारतीय हथियारों की ओर देख रहा है, जिससे भारत से हथियारों की आपूर्ति बढ़ सकती है। इसके अलावा, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फार्मा उत्पाद, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी और सेवा क्षेत्र से जुड़ी वस्तुओं के निर्यात में भी तेज वृद्धि की उम्मीद है।
2. भारतीय कंपनियों की यूरोप में पैठ: एफटीए डील गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करेगी, जिससे अधिक से अधिक भारतीय कंपनियां यूरोप में अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी। इसके साथ ही, भारतीय पेशेवरों को भी यूरोप में काम करने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। यूरोप वर्तमान में अमेरिका को बड़े पैमाने पर फंड करता है, लेकिन अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही है, और अमेरिकी दबाव के कारण यूरोप को अक्सर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में भारत यूरोप के लिए एक बड़ा और आकर्षक बाजार बन सकता है, जहां वे निवेश कर सकते हैं, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है। यूरोपीय निवेश से स्टार्टअप्स को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।
3. नए रोजगार के अवसर: इस समझौते से विनिर्माण, आईटी और डिजिटल सेवा, लॉजिस्टिक्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) जैसे क्षेत्रों में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
4. मेक इन इंडिया को बढ़ावा: एफटीए डील से भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच उन वस्तुओं का भी व्यापार बढ़ेगा जो भारत में बनती हैं। इसमें रक्षा उपकरण से लेकर अन्य विनिर्माण उत्पाद शामिल हैं। साथ ही, यूरोप से कम लागत में कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा, जिससे भारत में वस्तुओं का निर्माण अधिक किफायती होगा। बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित होगा, नई फैक्ट्रियां खुलेंगी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी सुगम हो जाएगा।
5. चीन पर निर्भरता में कमी: भारत लंबे समय से चीन का एक प्रभावी विकल्प तलाश रहा है, और यूरोप के साथ इस डील से यह इच्छा पूरी हो सकती है। यूरोप भारत के लिए एक भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बनकर उभरेगा, जिससे कई उत्पादों पर चीन से निर्भरता कम होगी। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों के लिए नई फंडिंग मिलने की संभावना है।
भारत के लिए विशाल यूरोपीय बाजार
वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग ₹11.8 लाख करोड़ (136.5 अरब डॉलर) का व्यापार दर्ज किया गया था। इसमें भारत का निर्यात 75.8 अरब डॉलर और आयात 60.7 अरब डॉलर रहा। एफटीए डील के बाद भारत का निर्यात तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। सेवा क्षेत्र से लेकर विनिर्माण तक, यूरोपीय बाजार में भारतीय वस्तुओं की पहुंच और संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत को इस समझौते से कितना बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
यूरोप में 450 मिलियन से अधिक लोग निवास करते हैं और यह 20 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था वाला दुनिया का विशाल बाजार है। एफटीए के तहत भारत को इस बड़े बाजार में कम या बिना किसी कर के प्रवेश मिलेगा। यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े व्यापार ब्लॉकों में से एक है, और इसका हिस्सा बनने से भारत को निर्यात, निवेश और व्यवसाय में दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। अनुमान है कि इस डील के बाद भारत का यूरोपीय संघ में कारोबार 136 अरब डॉलर से बढ़कर 200 से 250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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