नयी दिल्ली। सरकार जिन चीजों से अपना राजस्व हासिल करती है, उनमें विनिवेश शामिल है। विनिवेश का मतलब है कि सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचना। सरकार हर बार बजट में विनिवेश टार्गेट तय करती है। इस बार बजट में विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रु जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी कंपनियों को प्राइवेट करने पर एक बड़ा ऐलान किया है। पीएम मोदी ने कहा है कि बिजनेस करना सरकार का काम नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि कुछ सरकारी कंपनियों (पीएसयू) को छोड़ कर बाकी सभी पीएसयू को प्राइवेट कर दिया जाएगा। यानी सरकार का प्लान अधितर सरकारी कंपनियों को बेचने का है, जिससे उनका निजीकरण या प्राइवेटाइजेशन होगा।
ये सरकार का खास मंत्र
पीएम मोदी ने निवेश विभाग और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन के निजीकरण पर एक वेबिनार में बोलते हुए कहा कि निजी क्षेत्र से नौकरियां पैदा होती हैं। बता दें कि मोदी सरकार पहले के मुकाबले प्राइवेटाइजेशन पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इसलिए सरकार पीएसयू को बेचने के लिए प्रतिबद्ध है। असल में वे सरकारी कंपनियां जो आर्थिक तौर मजबूत नहीं है उन्हें सरकार को वित्तीय सपोर्ट करना पड़ता है, जिससे इकोनॉमी पर भी बोझ पड़ता है।
हुआ है सरकार का विरोध
बता दें कि सरकार को अपनी आक्रामक प्राइवेटाइजेशन नीति के लिए विरोध का भी सामना करना पड़ा है। विपक्ष के अलावा बैंक और कर्मचारी यूनियन इस मामले पर सरकार के विरोध में है। बैंक यूनियन इस सिलसिले में हड़ताल भी करेंगी। एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार 4 बैंकों को प्राइवेट करने का प्लान बना रही है। इनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।
एलआईसी आईपीओ का विरोध
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020 में एलआईसी के आईपीओ का ऐलान किया था। एलआईसी के आईपीओ के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। इससे सरकार को मोटी रकम हासिल होगी। मगर कर्मचारी संगठन इसके भी विरोध में हैं। पिछले साल एलएआईसी के प्रस्तावित आईपीओ के खिलाफ अखिल भारतीय एलआईसी कर्मचारी महासंघ सामने आया था। इस संगठन ने पीएम मोदी को पत्र लिख कर एलआईसी को बचाने की गुहार भी लगाई थी।
मिलेंगे 2.5 लाख करोड़ रु
पीएम मोदी के अनुसार सरकार के पास कई अंडरयूटिलाइज्ड एसेट्स (वे संपत्तियां जिनका कम ही इस्तेमाल है) हैं और इनसे सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटा सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर सभी क्षेत्रों में सरकारी कपनियों के निजीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री का ये बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार ने निजीकरण पर अधिक ध्यान देने के साथ अपनी विनिवेश और संपत्ति मुद्रीकरण (संपत्ति बेच कर पैसा जुटाना) नीतियों को फिर से रणनीतिक रूप दिया है।
अगले महीने होगी हड़ताल
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू), नौ यूनियनों का एक मुख्य समूह, ने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ मार्च में दो दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। ये हड़ताल 15 मार्च से शुरू होगी। 2019 में पहले ही आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट कर चुकी है। इसके लिए एलआईसी को बैंक की ज्यादातर हिस्सेदारी बेची गयी है। साथ ही 14 सरकारी बैंकों का पिछले सालों में आपस में विलय कर दिया गया है।
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