SENSEX Prediction 2026: पिछले कुछ समय में घरेलू शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस उतार-चढ़ाव के बीच बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 85000 के आसपास पिछले कई हफ्तों से कंसोलिडेट कर रहा है। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि बाज़ार में तेजी कब लौटेगी और किन सेक्टर्स में कमाई के चांस बनने की प्रबल संभावना है।
अब इसी कड़ी में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने सेंसेक्स को लेकर अपनी नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स के 95,000 के स्तर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। यह मौजूदा स्तरों से 13% की बढ़ोतरी दर्शाता है। फर्म के अनुसार, इस बेस केस के अगले 12 महीनों में पूरे होने की 50% संभावना है।
BULL Case: दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स 1,07,000 के लेवल को छू जाएगा!
हालांकि, मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मार्केट में बुल के हावी होने पर सेंसेक्स दिसंबर 2026 तक 1,07,000 के लक्ष्य को छू सकता है, जो मौजूदा स्तरों से 26% की संभावित वृद्धि को दर्शाता है और इस परिदृश्य के पूरे होने की संभावना 30% है।

यह टारगेट 23.5 गुना के P/E मल्टीपल को दर्शाता है, जो पिछले 25 वर्षों के 22 गुना के औसत से अधिक है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2026 स्टॉक्स में मैक्रो-आधारित ट्रेड का साल होगा, जो 2025 के स्टॉक-पिकिंग माहौल से एक बड़ा बदलाव होगा। ब्रोकरेज का कहना है कि सरकार के नीतिगत कदम और चक्रीय रिकवरी भारत की दीर्घकालिक विकास गाथा को मजबूत कर रहे हैं।
BEAR Case: गिरावट में 76000 तक आ सकता है सेंसेक्स
वहीं, डाउनसाइड की स्थिति में, मॉर्गन स्टेनली ने सेंसेक्स का लक्ष्य 76,000 रखा है। फर्म का मानना है कि संभावित जोखिमों में से अधिकांश घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक कारकों से जुड़े हैं।
इन सेक्टर्स के शेयरों में मिल सकते हैं कमाई के मौके
मॉर्गन स्टेनली कुछ खास सेक्टर्स पर दांव लगा रहा है। इनमें कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और इंडस्ट्रियल्स सेक्टर शामिल हैं, जिन पर फर्म 300 बीपीएस ओवरवेट है। शहरी मांग में रिकवरी से समग्र खपत को सहारा मिलने की उम्मीद है, और जीएसटी कटौती से इस सेक्टर को लाभ हो सकता है। सरकारी कैपेक्स मजबूत है और निजी कैपेक्स में भी तेजी की उम्मीद है।
फाइनेंशियल्स सेक्टर पर भी ब्रोकरेज 200 बीपीएस तक ओवरवेट है, क्योंकि क्रेडिट ग्रोथ बढ़ रही है और क्रेडिट लागत कम है। हालांकि, NIMs (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) पर दबाव रह सकता है. डी-रेगुलेशन इस सेक्टर के लिए सकारात्मक माना जा रहा है.
कम्युनिकेशन सर्विसेज, कंज्यूमर स्टेपल्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर्स को ब्रोकरेज ने इक्वलवेट रखा है. वहीं, यूटिलिटीज (100 बीपीएस), एनर्जी (200 बीपीएस), हेल्थकेयर (200 बीपीएस) और मैटेरियल्स (300 बीपीएस) को अंडरवेट रखा गया है। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, भारत की दीर्घकालिक विकास गाथा पहले से कहीं अधिक मजबूत दिख रही है और 2026 में बाजार मैक्रो-ड्रिवन ट्रेंड में प्रवेश कर सकता है।
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