मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए जरूरी अपडेट है. मध्य भारत में मानसून के पहुंचने में समय लग सकता है. क्योंकि रेमल सायक्लोन ने इसे कमजोर कर दिया है. इसके चलते मध्य और उत्तर भारत में मानसून के बादल देरी से पहुंचेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स में पृथ्वी और विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव माधवन राजीवन ने इस बात का दावा किया है. उन्होंने कहा कि मानसून 3 से 4 दौर में आगे बढ़ता है. लेकिन पहले चरण में ही चक्रवात रेमल ने मानसून की रफ्तार को कमजोर कर दिया है. अब दूसरा चरण आएगा और इसकी रफ्तार को बढ़ाएगा.
मानसून की रफ्तार हुई धीमी
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में माधवन ने कहा कि मानसून की रफ्तार 20 जून के बाद ही पूरी तरह गति पकड़ेगा. बता दें कि इस बार केरल में मानसून ने 30 मई से पहले पहुंचा था. पूर्वोत्तर में मानसून अपने सामान्य समय से करीब 6 दिन पहले ही पहुंच गया था. वहीं, मौसम विभाग ने बताया कि मानसून मध्य अरब सागर के कई हिस्सों में पहुंच चुका है. इसी वजह से कर्नाटक के ज्यादातर हिस्सों समते दक्षिण महाराष्ट्र, पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में जमकर बारिश हो रही है.

सामान्य से ज्यादा रहेगा मानसून
IMD का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. इस लिहाज से आने वाले 3 से 4 दिनों में पूरे कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और दक्षिण ओडिशा में मानसून पहुंचेगा. मौसम विभाग ने कहा कि इस बार मानसून सामान्य से ज्यादा रह सकता है. इसका मतलब ये है कि लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी LPA 106% रहने का अनुमान है.
दिल्ली में इस तारीख को पहुंचेगा मानसून
ताजा अनुमान के मुताबिक 6 जून को मानसून महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्रों में प्रवेश कर लिया है. अब मानसून रत्नागिरी और सोलापुर की ओर बढ़ रहा है. इस लिहाज से मुंबई में 9 से 10 जून के आसपास मानसून आने की उम्मीद है. मानसून मध्य भारत में सामान्य से ज्यादा रहने के संकेत हैं. उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य और उत्तर-पूर्व में सामान्य से कम रह सकता है. बता दें कि पिछले साल 25 जून को दिल्ली में मानसून ने दस्तक दी थी.


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