
Most Safe Banks 2023 : भारत के टॉप तीन बैंक हैं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक। इन्हें आरबीआई ने घरेलू प्रणालीगत महत्वपूर्ण बैंकों (डी-एसआईबी) की लिस्ट में बरकरार रखा है। घरेलू व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण बैंक को आसान शब्दों में कहेंगे वे बैंक जिनकी विफलता पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को प्रभावित कर सकती है और भारी अस्थिरता पैदा कर सकती है। यही कारण है कि आरबीआई जैसे बैंकिंग नियामकों ने इन्हें उन ऋणदाताओं (बैंकों) की लिस्ट में जगह दी है जो डूबने के लिए बहुत बड़े हैं। यही वजह है कि ये देश के सबसे भरोसे वाले बैंक हैं। इन बैंकों में आपका पैसा सबसे अधिक सेफ रहेगा।
आरबीआई ने दिया बड़ा बयान
2 जनवरी की आरबीआई ने एक प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें इसने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक घरेलू व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण बैंक हैं। डी-एसआईबी की 2021 की लिस्ट के समान ही बकेटिंग स्ट्रक्चर के तहत इन बैंकों को सबसे फिर से इस लिस्ट में जगह दी गयी है।
2008 के बाद बदले हालात
इन सिस्टेमैटेकली महत्वपूर्ण बैंकों पर आमतौर पर केंद्रीय बैंक काफी करीबी नजर रखते हैं। इन पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है। बता दें कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपने-अपने देश के ऐसे बैंकिंग संस्थानों पर करीब से नजर रखना शुरू किया था।
सख्त किए जा रहे नियम
डी-एसआईबी के लिए आरबीआई अभी और भी सख्त नियम बना रहा है। आरबीआई के मुताबिक डी-एसआईबी के लिए अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर 1 (सीईटी1) की प्रोसेस 1 अप्रैल, 2016 से चरणबद्ध तरीके से शुरू की गयी थी और 1 अप्रैल, 2019 से यह पूरी तरह से प्रभावी हो गई थी। अतिरिक्त सीईटी1 आवश्यकता कैपिटल कंवर्जेशन बफर के अलावा होगी।
क्या होंगे नियम
आरबीआई की ताजा प्रेस रिलीज के अनुसार, एसबीआई को अपनी रिस्क वेटेड एसेट्स के प्रतिशत के रूप में अतिरिक्त 0.60 प्रतिशत सीईटी1 बनाए रखना होगा। इसी तरह, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक को अतिरिक्त 0.20 प्रतिशत बनाए रखने की जरूरत होगी।
विदेशी बैंकों के लिए नियम
आरबीआई ने 22 जुलाई, 2014 को डी-एसआईबी से डील करने के लिए फ्रेमवर्क जारी किया था। डी-एसआईबी फ्रेमवर्क के लिए रिजर्व बैंक को 2015 से शुरू होने वाले डी-एसआईबी के रूप में चुने गये बैंकों के नामों का खुलासा करने और इन बैंकों को उनके सिस्टेमैटिक इंपोर्टेंस स्कोर्स (एसआईएस) के आधार पर उपयुक्त बकेट में रखना है। इस बकेट के आधार पर, जिसमें डी-एसआईबी रखे गये हैं, उस पर एक अतिरिक्त सामान्य इक्विटी आवश्यकता लागू की जानी है। यदि किसी विदेशी बैंक की भारत में शाखा मौजूद है, तो यह एक वैश्विक व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण बैंक (जी-एसआईबी) होगा। उस बैंक को भारत में अतिरिक्त सीईटी1 कैपिटल सरचार्ज बनाए रखना होगा, जैसा कि जी-एसआईबी के रूप में लागू होता है, जो भारत में इसकी जोखिम भारित संपत्ति (आरडब्ल्यूए) के अनुपात में होगा। आरबीआई ने 2015 और 2016 में एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक को डी-एसआईबी के रूप में घोषित किया था। 31 मार्च 2017 तक बैंकों के कलेक्ट किए गए आंकड़ों के आधार पर, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के साथ एचडीएफसी बैंक को भी डी-एसआईबी के रूप में क्लासिफाइड किया गया था।
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