नयी दिल्ली। बिजनेस के लिए बढ़िया आइडिया की जरूरत होती है। अगर आइडिया फेल हो जाए तो निराश होने की जरूरत नहीं, बल्कि आप आइडिया को थोड़ा बदल कर अपना बिजनेस सफल बना सकते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है छत्तीसगढ़ के एक पशुपालक के साथ, जिन्होंने थोड़े से बदलाव से अपनी जिंदगी बदल ली। इस पशुपालक को गाय के दूध से फायदा नहीं मिला तो इन्होंने उसी के गोबर से पैसा कमाना शुरू कर दिया।
कैसे की गोबर से कमाई
एक रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के रहने वाले एक किसान विश्राम पटेल का एक फैसला उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। पटेल पशुपालक हैं और उनके पास 40 मवेशी हैं। एक समय था जब उनके लिए इन पशुओं का भरण-पोषण भी भारी पड़ रहा था। वे इन सभी पशुओं को बेचने की सोच रहे थे। मगर फिर एक सरकारी योजना के ऐलान के बाद उनका इरादा बदला। ये है राज्य सरकार की गोधन न्याय योजना। इस योजना के तहत राज्य सरकार पशुपालकों से गोबर खरीदती है। इस गोबर के जरिए सरकार जैविक खेती को बढ़ाने के अलावा पशुपालकों की आर्थिक मदद भी करना चाहती है।
बदल गया मन और होने लगी कमाई
पटेल ने इस योजना के बारे में सुनते ही अपना इरादा बदल लिया और गोधन न्याय योजना का फायदा उठाने का फैसला किया। वे इस गोबर से हजारों रु कमा रहे हैं। केवल 2 बार में ही उन्हें 16 हजार रु गोबर बेचने से मिल गए। साथ में दूध की भी थोड़ी-बहुत इनकम जारी है। यानी वे अब मुनाफे में आ गए हैं। उन्होंने शुरुआत में इस योजना में हाथ आजमाने के लिए गोबर इकट्ठा किया। 40 मवेशियों से करीब 300 किलो गोबर इकट्ठा हो गया। उन्होंने ऐसे ही इकट्ठा करके गोबर बेचा और दो किस्तों में 16000 रु कमाए।
डेली कमाई 1200 रु
वे एक दिन में उन्होंने 700 रु गोबर और 500 रु गोबर बेच कर कमाए। यानी दूध से ज्यादा वो गोबर से कमा रहे हैं। एक समय पहले तक वे मवेशियों के लिए हरे चारा का इंतजाम कर पा रहे थे, मगर चीजें उनके बस से बाहर हो रही थीं। मगर गोधन न्याय योजना से उनकी इनकम काफी बढ़ी। उन्होंने इस एक्स्ट्रा इनकम से मवेशियों की अच्छी देख-रेख करने में मदद मिल रही है।
क्या है गोधन न्याय योजना
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने जुलाई में गोधन न्याय योजना के प्रस्ताव को पास किया था। फिर राज्य की कैबिनेट ने भी इस योजना को मंजूरी दे दी थी। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत सरकार पशुपालकों गोबर खरीदती है। ये गोबर पशुपालकों से 2 रु प्रति किलो (टांसपोर्ट शुल्क सहित) के रेट पर खरीदा जाता है। योजना का शुभारंभ 20 जुलाई से किया गया था।
भैंस का भी गोबर खरीदा जाता है
इस योजना के तहत सरकार गो और भैंस वंशीय पशुओं का गोबर खरीदती है। पशुपालकों से गोठान समितियों के जरिए गोबर खरीदा जाता है, जिससे वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार होते हैं। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है। साथ ही ग्रामीण और शहरी इलाकों के पशुपालकों की इनकम बढ़ेगी। इसके अलावा राज्य में गौपालन को बढ़ावा मिलेगा।
More From GoodReturns

Juniper Green Energy और MV Electrosystems IPO: आज जारी होगा अलॉटमेंट स्टेटस, ऐसे करें चेक

Navin Fluorine के शेयरों में तूफानी तेजी! Q1 Results के दौड़ा शेयर, आगे क्या होगा?

DTH और Cable TV होने वाला है बंद? सरकार के नए नियमों का पूरा Fact Check!

ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका

GST e-Way Bill में बड़ा बदलाव: 1 अगस्त से Ship-to GSTIN अनिवार्य, कहीं आपका माल न रुक जाए!

पेट्रोल-डीजल के दाम: आज भी राहत या झटका? जानें अपने शहर के रेट और बचत का गणित

RBI MPC Policy: आज ब्याज दरों पर बड़ा फैसला, आपकी EMI और FD पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट: आज इन 5 सेक्टर्स के शेयरों में दिखेगी हलचल, चेक करें लिस्ट

3 अगस्त को सोने के दाम स्थिर: क्या आज खरीदारी करना सही रहेगा? जानें 22K और 24K के ताजा रेट

Britannia से Cummins तक, आज इन 5 शेयरों में हलचल, इंट्राडे में रखें नजर!

आज 2 अगस्त को सोने के दाम स्थिर: क्या खरीदारी का सही मौका है? जानें 22K-24K के ताजा रेट



Click it and Unblock the Notifications