Ratan Tata Will: हाल ही में रतन टाटा की वसीयत की चर्चा हर तरफ हो रही है। इसमें मोहिनी मोहन दत्ता को 500 करोड़ रुपये की वसीयत का खुलासा हुआ है, जिनका नाम पहले टाटा से जुड़ा नहीं था। इस खुलासे ने परिवार और परिचितों को हैरान कर दिया है। वसीयत में रतन के सौतेले भाई नोएल टाटा को किसी भी तरह की विरासत से बाहर रखा गया है।

टाटा ने अपनी 1500 करोड़ की संपत्ति में से एक तिहाई यानी 500 करोड़ को मोहिनी मोहन दत्ता के नाम करने की बात कही है। मोहिनी मोहन ऐसे शख्स हैं जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। अचानक उनका नाम सामने आने के बाद रतन टाटा की प्रॉपर्टी के बंटवारे को लेकर विवाद होने की आशंका जताई जा रही है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर मोहिनी मोहन दत्ता कौन हैं।
कौन हैं मोहिनी मोहन दत्ता?
74 वर्षीय मोहिनी मोहन दत्ता टाटा ग्रुप के भूतपूर्व कर्मचारी हैं। उनका दावा है कि रतन टाटा के साथ उनके घनिष्ठ संबंध हैं और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें रतन टाटा की वसीयत में अधिक हिस्सा मिलने की उम्मीद है। दत्ता का दावा है कि उनकी पहली मुलाकात टाटा से 24 साल की उम्र में जमशेदपुर में हुई थी, जहां से उनके लंबे समय तक साथ रहने की शुरुआत हुई।
अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के अंतिम संस्कार के दौरान दत्ता ने उनके साथ अपने संबंधों के बारे में जानकारी साझा की थी। उनका रिश्ता छह दशकों तक चला, जिसकी शुरुआत तब हुई जब दत्ता ताज होटल्स में काम करते थे। बाद में, टाटा इंडस्ट्रीज ने दत्ता के बिजनेस, स्टैलियन ट्रैवल एजेंसी में निवेश किया, जिसका बाद ताज के ट्रैवल डिवीजन में विलय हो गया।
वसीयत में परिवार वालों का नाम शामिल
टाटा कैपिटल ने बाद में स्टैलियन ट्रैवल एजेंसी का अधिग्रहण किया और इसे थॉमस कुक (इंडिया) को बेच दिया। मोहन दत्ता इसके निदेशक बने हुए हैं और जल्द ही सार्वजनिक होने वाली टाटा कैपिटल सहित टाटा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों में उनके शेयर हैं। इन संबंधों के बावजूद, दत्ता के "अडॉप्टेड पुत्र" होने के दावे को कानूनी रूप से मान्यता नहीं मिली है।
रतन टाटा की वसीयत को अभी बॉम्बे हाई कोर्ट से प्रमाणित होना बाकी है। रतन टाटा का निधन अक्टूबर 2024 में हो गया। उनकी वसीयत में दोस्तों, परिवार और सौतेली बहनों के लिए कुछ प्रावधान किया गया है, लेकिन नोएल टाटा और उनके बच्चों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, जिमी टाटा को संपत्ति से 50 करोड़ रुपये मिल हैं। रतन टाटा की सौतेली बहनों शिरीन जीजीभॉय और डायना जीजीभॉय ने अपनी विरासत का हिस्सा दान करने में रुचि दिखाई है।


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