नई दिल्ली, अक्टूबर 29। मोदी सरकार ने रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल 3 साल के लिए बढ़ाया है। शक्तिकांत अब 2024 तक आरबीआई के गवर्नर बने रहेंगे। शक्तिकांत को दिसंबर 2018 में उर्जित पटेल के स्थान पर आरबीआई का गवर्नर नियुक्त किया गया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने शक्तिकांत को 10 दिसंबर, 2021 से फिर से 3 साल के लिए आरबीआई का गवर्नर नियुक्त करने के फैसले पर मंजूरी दे दी है।
जानिए शक्तिकांत दास के बारे में
शक्तिकांत दास का जनम 6 फरवरी 1957 को हुआ थाा। वह इतिहास में एम.ए हैं और तमिलनाडु कैडर से आईएएस अफसर हैं। शक्तिकांत वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स में जॉइंट सेक्रेटरी बजट, तमिलनाडु सरकार के राजस्व विभाग में कमिश्नर और स्पेशल कमिश्नर, तमिलनाडु के इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट में सेक्रेटरी और अन्य विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। वह मई 2017 तक इकनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी थे।

रेपो रेट में भारी कटौती की
शक्तिकांत दास जब आरबीआई के गवर्नर नियुक्त हुए तो कई तरह के विवाद चल रहे थे। लेकिन शक्तिकांत ने आते ही हर मामले में आम सहमति बनाने का सिलसिला शुरू किया। इसके चलते कई अहम मुद्दे आसानी से हल हो गए। शक्तिकांत दास के कार्यकाल में आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में काफी कटौती का साहसिक फैसला किया। इसके चलते रेपो और रिवर्स रेपो रेट रिकॉर्ड निचले स्तर पर हैं। आरबीआई कानून के अनुसार सरकार आरबीआई के गवर्नर की नियुक्ति करती है। आरबीआई गवर्नर का कार्यकाल 5 साल से ज्यादा नहीं हो सकता है। लेकिन, सरकार चाहे तो लगातार दूसरी बार आरबीआई गवर्नर नियुक्त कर सकती है।
शक्तिकांत दास के प्रमुख फैसले
- बैंकों को लोन को रेपो रेट से जोड़ने के लिए बाध्य किया
- स्मॉल फाइनैंस कंपनियों के लाइसेंसिंग प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया
- केन्द्र सरकार को 1.23 लाख करोड़ का डिविडेंड दिया
- एमएसएमई सेक्टर पर कर्ज के बोझ को दूर करने के लिए लोन री-स्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दी
- बैंकों के सीईओ के लिए रिटायरमेंट की उम्र सीमा 75 साल कर दी
- आर्थिक विकास दर गिरने के बावजूद महंगाई नियंत्रण में रखी


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