जल्‍द 4-5 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकते हैं अमूल दूध के दाम

ज्यादातर दूध डायरी ने हाल ही में अपने दूध के दामों में भी बढ़ोतरी की है। अब दूध की कीमतों में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

नई द‍िल्‍ली: ज्यादातर दूध डायरी ने हाल ही में अपने दूध के दामों में भी बढ़ोतरी की है। अब दूध की कीमतों में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। आम जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। देश की जानी-मानी कंपनी अमूल फिर से दूध के दाम बढ़ाने की तैयारी में है। किस्तों में खरीदारी में भारतीय अव्वल, तेजी से बढ़ रही बिक्री ये भी पढ़ें

4-5 रुपये प्रति लीटर महंगा होगा अमूल दूध

4-5 रुपये प्रति लीटर महंगा होगा अमूल दूध

अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर आरएस सोढ़ी ने हाल ही में बताया कि दूध के दामों में 4-5 रुपये प्रति लीटर और दूध के प्रोडक्ट्स में 8-10 रुपये प्रति लीटर का इजाफा होने की उम्मीद है। वहीं उन्होंने यह अभी कहा कि जिन कंपनियों के पास ज्यादा सप्लाई की क्षमता है, उन्हें इस साल ज्यादा मुनाफा होगा। अमूल के चीफ के मुताबिक डेयरी कंपनियों ने पिछले तीन सालों में दो बार दूध के दामों में बढ़ोतरी की है। इसकी वजह से डेयरी किसानों की आमदनी में 2018 के मुकाबले 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

किसानों के लिए शुरू हुई नई स्कीम उड़ान

किसानों के लिए शुरू हुई नई स्कीम उड़ान

मालूम हो कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में किए गए एलानों पर आरएस सोढ़ी मे कहा कि बजट में डेयरी इंडस्ट्री के लिए प्रोत्साहन देने वाले कई प्रस्ताव हैं। वित्त मंत्री ने एलान किया था कि सरकार का लक्ष्य है कि देश में दूध की प्रोसेसिंग के आंकड़े को 2025 तक 53.5 मिलियन मेट्रिक टन से दोगुना करके 108 मिलियन मेट्रिक टन किया जाएगा। इसके लिए 40,000 से 50,000 करोड़ के निवेश की जरूरत होगी। जानकारी दें कि सरकार ने दूध समेत कई दूसरे प्रोडक्ट्स को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने को आसान बनाने के लिए भी कई खास प्रोजेक्ट्स का एलान किया है। इसके साथ उन्होंने कहा कि रेलवे और नारिक एवं उड्डयन मंत्रालय कृषि उड़ान और किसान रेल पर काम करेगा। इनका लक्ष्य कृषि उत्पाद के भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन को बेहतर बनाना है।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रही सरकार

मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रही सरकार

बजट 2020 में किए गए एलानों पर आरएस सोढ़ी ने कहा कि सरकार मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रही है। वहीं डेयरी उद्योग संरक्षणवाद को लेकर काफी मुखर रहा है और आरसीईपी डील का सबसे बड़ी विरोधी रहा है। डेयरी सेक्टर के आयातों को लेकर चिंताओं पर आरएस सोढ़ी ने बताया था कि इससे विदेशी कंपनियों का एकाधिकार हो जाएगा। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़ी कॉरपोरेशन को मदद मिलेगी और भारत आयात पर निर्भर रहेगा।

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