मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार की धड़कन तेज कर दी है। Israel और Iran के बीच टकराव की खबरों के बाद कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं।

सप्लाई रूट क्यों है अहम?
बाजार की नजर खास तौर पर Strait of Hormuz पर है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल का मुख्य रास्ता है। यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई को प्रभावित कर सकती है। इसी आशंका से ट्रेडर्स सतर्क हैं और कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल
हाल के सत्रों में Brent Crude और WTI Crude Oil दोनों में तेजी देखी गई है।
WTI करीब 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
ब्रेंट 72 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है।
इस साल अब तक तेल लगभग 20 प्रतिशत महंगा हो चुका है। अगर तनाव लंबा खिंचा, तो 80 डॉलर का स्तर बाजार में चर्चा का विषय बना रहेगा।
भारत की जेब पर असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर पेट्रोल और डीजल के दाम ऊपर जा सकते हैं। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं पर दिखेगा। महंगाई बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।
शेयर बाजार में दबाव की आशंका
तेल की कीमतों में उछाल से कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जैसे Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है।
ऑटो, एयरलाइन, पेंट और टायर कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। निवेशकों को ऐसे माहौल में सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है।
आगे क्या?
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर टिकी है। अगर स्थिति शांत होती है तो बाजार को राहत मिल सकती है। लेकिन तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतें और चढ़ सकती हैं।
आने वाले दिन आम लोगों और निवेशकों दोनों के लिए अहम होंगे। इसलिए बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर नजर रखना जरूरी है।


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