Mid & Small Cap Crash: मिड और स्मॉल कैप सेक्टर में तेज बिकवाली! क्यों 2025 में इंडेक्स 7-9% तक फिसले?

Mid & Small cap Sector Fall: विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जबकि घरेलू निवेशक भारतीय बाजार में सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहे हैं। इसके बावजूद, गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। लार्ज-कैप स्टॉक में लचीलापन दिख रहा है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार कमजोर हो रहा है। 2025 की शुरुआत भारतीय बाजार के लिए अनुकूल नहीं रही है, जिसने हाल ही में काफी उथल-पुथल का सामना किया है।

2025 में तेजी से गिरे मिडकैप और स्मॉलकैप

इस साल निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स में करीब 7% की गिरावट आई है, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में करीब 9% की गिरावट आई है। इसके विपरीत, निफ्टी 50 इंडेक्स में सिर्फ 2% की गिरावट देखी गई है। खास बात यह है कि इन इंडेक्स में 400 में से 280 स्टॉक (70%) अपने संबंधित 200-दिवसीय मूविंग एवरेज (DMA) से नीचे कारोबार कर रहे हैं।

बाज़ार के ट्रेंड और इनवेस्टर्स का भरोसा

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने कई सालों तक शानदार रिटर्न देने के बाद भी खराब प्रदर्शन किया है। इन सूचकांकों के लिए आखिरी नकारात्मक रिटर्न 2019 में था जब निफ्टी मिडकैप 100 में 4% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 10% की गिरावट आई थी। तब से, इन शेयरों में उछाल आया है, जिससे वे लार्ज-कैप शेयरों की तुलना में महंगे हो गए हैं।

Mid  amp amp  Small Cap Crash

निवेशक अब लार्ज-कैप स्टॉक में बेहतर मूल्य देखते हैं और 2025 में मिड- और स्मॉल-कैप स्टॉक की तुलना में उन्हें प्राथमिकता देते हैं। वर्तमान में, निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स में 150 में से 109 स्टॉक (72%) अपने संबंधित डीएमए से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसी तरह, निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में 171 स्टॉक (68%) अपने डीएमए से नीचे हैं।

इन स्टॉक्स में तेज एक्शन

कल्याण ज्वैलर्स इंडिया, कीन्स टेक्नोलॉजी, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट, केईसी इंटरनेशनल, ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर, ओबेरॉय रियल्टी और पीबी फिनटेक को इस दौरान भारी नुकसान हुआ है, जिनमें 37% तक की गिरावट आई है। इसके विपरीत, वोडाफोन आइडिया, एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज, नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल, एसआरएफ, श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी, रेडिंगटन और सुंदरम फाइनेंस ने इस साल 20% तक की बढ़त हासिल की है।

सेक्टर के लिए बड़े फैक्टर्स

डॉलर इंडेक्स और यूएस बॉन्ड यील्ड उच्च स्तर पर बने हुए हैं। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए जल्द ही भारतीय बाजार में वापस आना मुश्किल हो गया है। विदेशी बिकवाली और घरेलू खरीद दोनों ही रुझान बने रहने की उम्मीद है।

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