Microsoft Layoffs 2025: माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारियों की फिर से हो सकती है छंटनी! जानें क्या है वजह

Microsoft Layoffs 2025: जेनरेटिव AI ने हमारी निजी और प्रोफेशनल लाइफ में तेजी से अपनी जगह बनाई है। एआई पर आधारित एप्लिकेशन अब कुछ इंसानी कामों को गैरजरूरी या कम प्रभावी बना रहे हैं। इसकी वजह से कंपनियों को अपनी स्ट्रेटजी में बदलाव करना पड़ रहा है। ऐसे में वर्कफोर्स में कटौती और AI बॉट्स या वर्चुअल एजेंट्स की जगह बनाना भी शामिल है।

Layoffs 2025

टेक कंपनियों में हुई इतनी छंटनी

इस ट्रेंड का नतीजा यह हुआ है कि टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी देखने को मिल रही है। बिजनेस के स्ट्रचर में बदलाव और ऑटोमेशन को अपनाने के चलते कई पेशेवरों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबकि, Layoffs.FYI के आंकड़ों में जानकारी दी गई है कि साल 2025 की शुरुआत से अब तक दुनियाभर में टेक कंपनियों ने 62,832 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इसमें गूगल, अमेजॉन जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। अब माइक्रोसॉफ्ट भी जल्द ही बड़े पैमाने पर छंटनी करने की तैयारी में है।

माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 6,000 कर्मचारियों की छंटनी की

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कटौती खास तौर पर सेल्स डिविजन में होगी। गौरतलब है कि इससे पहले भी माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 6,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी, जिसका मकसद एआई को बढ़ावा देना और कामकाज को नए तरीके से ढालना था।

गूगल से लेकर अमेजॉन और माइक्रोसॉफ्ट तक, तमाम बड़ी टेक कंपनियां अब लेबर वर्कफोर्स के बजाय एआई टेक्नोलॉजी पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं। इसके चलते लागत में कटौती, काम में तेजी और एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए वर्कफोर्स में भारी कमी की जा रही है।ये ट्रेंड साफ दिखा रहा है कि टेक इंडस्ट्री में ऑटोमेशन और जनरेटिव AI के बढ़ते यूज से नौकरियों में बदलाव आ रहा है।

एआई की वजह से लोगों की नौकरियों पर दबाव

माइक्रोसॉफ्ट इस समय तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी के दौर में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को प्राथमिकता दे रहा है। कंपनी भारी निवेश के जरिए डेटा सेंटर और AI रिसर्च को मजबूत कर रही है, ताकि AI टूल्स और सर्विसेज की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके - खासतौर पर उन बिजनेस क्लाइंट्स के लिए जो तेजी से AI को अपना रहे हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि माइक्रोसॉफ्ट ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए लगभग ₹6.6 लाख करोड़ ($80 बिलियन) का कैपिटल एक्सपेंडिचर तय किया है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपने डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर खर्च करेगी। इसका मकसद यह है कि जो मौजूदा डेटा सेंटर AI सर्विसेस को संभाल रहे हैं, उन पर से बोझ कम किया जा सके और भविष्य की जरूरतों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

माइक्रोसॉफ्ट की यह स्ट्रेटजी दिखाती है कि वह AI को सिर्फ एक टेक्नोलॉजी ट्रेंड के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की नींव मानकर काम कर रहा है और इसके लिए वह तकनीकी स्ट्रचर और संसाधनों दोनों में जबरदस्त निवेश कर रहा है।

Amazon के सीईओ ने दी ये जानकारी

Amazon के CEO एंडी जैसी ने कंपनी के कर्मचारियों को एक ओपन लेटर में जानकारी दी है कि आने वाले समय में जनरेटिव AI और AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के वजह से वर्कफोर्स में कटौती हो सकती है।

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जैसे-जैसे जनरेटिव AI और ऑटोमेटेड एजेंट्स का रोल बढ़ेगा, काम करने का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा और इसका सीधा असर कर्मचारियों की जरूरत पर पड़ेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब टेक इंडस्ट्री पहले से ही बड़े पैमाने पर छंटनियों का सामना कर रही है।

एंडी जैसी ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि आने वाले समय में कुछ मौजूदा नौकरियों के लिए कम लोगों की जरूरत होगी, जबकि कुछ नई तरह की नौकरियों के लिए ज्यादा लोगों की आवश्यकता पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से कामकाज की दक्षता तो बढ़ेगी, लेकिन इसके साथ ही ट्रेडिशनल नौकरियों में गिरावट भी देखी जाएगी। ऐसे में कंपनी आने वाले सालों में वर्कफोर्स में कमी की उम्मीद कर रही है।

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