Microsoft vs Apple News: आपको बताते चलें कि माइक्रोसॉफ्ट ने एप्पल को पीछे छोड़ दिया है और वैल्यूएशन के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है। आपको बता दे कि फिलहाल एप्पल के शेरों में गिरावट और कमजोरी भी देखने को मिली है, वही माइक्रोसॉफ्ट के शेयर में 1.6 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली यही कारण है कि माइक्रोसॉफ्ट का मार्केट वैल्यूएशन बढ़कर 2.875 लाख करोड़ रुपए डॉलर हो गया और वह वैल्यूएशन के मामले में दुनिया की नंबर एक कंपनी बन चुकी है।
आपको बताते चलें की डिमांड की चिंता की वजह से साल 2024 में एप्पल के शहरों में कमजोरी देखने को मिल रही है। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर्स में तेजी देखने को मिली और इसी आधार पर उसका मार्केट वैल्यूएशन भी बढ़ गया। वहीं अगर बात की जाए स्मार्टफोन कंपनी प्रोडक्शन एप्पल की तो 11 जनवरी को उसके शेयर में 0.9 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

इस मामूली गिरावट के साथ एप्पल का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 2.871 लाख करोड़ डॉलर पहुंच गया। इसी के साथ माइक्रोसॉफ्ट ने एप्पल से 0.004 लाख करोड़ की ज्यादा मार्केट वैल्यूएशन प्राप्त की है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसके पहले साल 2021 में ऐसा समय आया था जब मार्केट कैपिटलाइजेशन में माइक्रोसॉफ्ट ने एप्पल को पीछे छोड़ दिया था। हालांकि 2021 के बाद से अब पहली बार ऐसा हुआ है जब माइक्रोसॉफ्ट ने एप्पल को फिर से पछड़ा है।
अगर बात करें दोनों कंपनी के शेयर्स की तो जनवरी के महीने में अब तक एप्पल के शेयर में 3.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं अगर बात करते हैं माइक्रोसॉफ्ट की तो इसके शेयर में 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
इस पर अमेरिका के शेयर बाजार के एक्सपर्ट ने भी अपनी राय रखी है। अमेरिकी शेयर बाजार विशेषज्ञ के मुताबिक लोगों को इस बात की पूरी जानकारी थी की माइक्रोसॉफ्ट इस महीने में एप्पल से आगे निकल सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस महीने में माइक्रोसॉफ्ट की ग्रोथ ज्यादा तेज रही है और उसे जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जबरदस्त फायदा भी मिला है।
आपको बताते चलें कि एप्पल के शेयर्स में भी लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है, इसका मुख्य कारण है कि कंपनी को कई बार ड्रोन ग्रेड किया जा चुका है और अब उसे आईफोन की बैटरी को लेकर काफी ज्यादा चिंता होने लगी है।
पिछले साल 2023 में 14 दिसंबर को एप्पल का मार्केट कैपिटल अपने उच्चतम स्तर पर था। इस दौरान कंपनी का मार्केट केपीटलाइजेशन बढ़कर 3.081 लाख करोड़ डॉलर पहुंच गया था। अगर बात की जाए पिछले साल की तो एप्पल के शेयर्स में 48 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली थी। लेकिन माइक्रोसॉफ्ट ने इसी टाइम पीरियड के दौरान अपने शहर में 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की थी।
लोग ऐसा मान रहे हैं कि माइक्रोसॉफ्ट को सबसे ज्यादा फायदा जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल करने से मिला है। हालांकि कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में ऐसे फ्लकचुएशंस आमतौर पर देखे जाते हैं। तो हो सकता है आने वाले कुछ दिनों में वापस एप्पल नंबर एक पर काफी हो जाए या फिर माइक्रोसॉफ्ट के शेयर में अगर और बढ़ोतरी देखने को मिलती है तो वह एप्पल से मार्केट कैपिटलाइजेशन में और ज्यादा आगे निकल सकता है।
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