Masala Ban News:किचन में फेवरेट इन 2 कंपनियों के मसालों पर चालू है जांच, करते हैं इस्तेमाल तो जरूर जान लें नाम

Which Spices Brand in Scrutiny: असली मसाले सच-सच, एवरेस्ट का तीखालाल, और भी कई सारी आपने ऐसे विज्ञापनों की टैग लाइन्स सुनी होंगी। इन लाइन्स को सुननों के बाद आपको मसालों के बारे में ख्याल आता होगा।

दशकों से, भारत के मसाला निर्माता एमडीएच और एवरेस्ट दुनिया भर के रसोईघरों में यूज हो रहे हैं और उनके उत्पाद चिकन और मछली करी और सब्जी व्यंजनों में आवश्यक सामग्री हैं।

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इन जगहों पर मसालों की हो रही है जांच

कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशक पाए जाने के बाद हांगकांग ने कुछ भारतीय मसालों के उत्पादों की बिक्री प्रतिबंध लगा दिया है। जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका, मालदीव, भारत और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में जांच की लहर शुरू हो गई है। दोनों ब्रांडों का कहना है कि उनके उत्पाद सुरक्षित हैं।

दरअसल देश के दो टॉप ब्रांड एमडीएच और एवरेस्ट के मसालों को हांगकॉन्ग और सिंगापुर में बैन होने के बाद भारतीय मसालों की निगेटिव चर्चा बहुत अधिक हो रही है।

इसके बाद यूरोप के भी कुछ देशों में इन्हें बैन किया गया है, जबकि कई ने अलर्ट जारी किया है। इससे भारतीय मसालों का एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हुआ है और साथ ही देश की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठा है।

इन दोनों ब्रांड्स की शुरुआत कई सालों पहले हुई थी लेकिन अब जांच के शिंकजे में फंसे होने के कारण लोग अब इन्हें देश-विदेश में खरीदने से डर रहे हैं।

ऐसे हुई थी MDH की शुरुआत

एमडीएच साल 1919 में शुरू हुआ था और यह एक परिवार द्वारा संचालित बिजनेस है। विज्ञापनों और पैकेजिंग से इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई।

इसके संस्थापक धर्मपाल गुलाटी भी शामिल थे, जो हैंडलबार मूंछें और पगड़ी पहनते थे। गुलाटी, जिन्हें अक्सर भारत का "स्पाइस किंग" कहा जाता है, का 2020 में निधन हो गया।

आपको बता दें कि एमडीएच की वेबसाइट के अनुसार उनके ब्रांड के 62 उत्पाद हैं। यह पिसे हुए मसालों के साथ-साथ मसाला मिश्रणों का भी कारोबार करता है जो दशकों के शोध के बाद बनाए गए थे।

एवरेस्ट ने ऐसे शुरू किया था बिजनेस

एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स की शुरुआत साल 1967 में तीन उत्पादों के साथ हुई। इसके संस्थापक वाडीलाल भाई शाह ने 200 वर्ग फुट की छोटी सी मसाले की दुकान से अपना मसालों का बिजनेस शुरू किया था।

यह ब्रांड 52 उत्पादों की वैरायटी पेश करती है। एवरेस्ट की आज उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, एशिया प्रशांत और अफ्रीका सहित लगभग 80 देशों में वैश्विक उपस्थिति है।

आपको बता दें कि इस ब्रांड की वेबसाइट के अनुसार, लगभग 20 मिलियन परिवार हर दिन एवरेस्ट उत्पादों का उपयोग करते हैं और इसके उत्पादों के 3.7 बिलियन पैक हर साल बेचे जाते हैं।

भारत के 1,000 छोटे कस्बों और शहरों में लगभग 620,000 आउटलेट एवरेस्ट उत्पाद बेचते हैं। सिर्फ यही नहीं, भारत के बॉलीवुड सेलेब्स अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान एवरेस्ट ब्रांड एंबेसडर हैं।

इन मसालों पर लगा प्रतिबंध
आपको बता दें कि हांगकांग और सिंगापुर द्वारा "गुणवत्ता संबंधी चिंताओं" के कारण उनके मसालों पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारतीय मसाला निर्माता एमडीएच और एवरेस्ट सवालों के घेरे में आ गए हैं।

सिंगापुर और हांगकांग के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन मसालों में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशक एथिलीन ऑक्साइड को स्वीकार्य सीमा से ऊपर पाया है।

इन मसालों में एमडीएच के मद्रास करी पाउडर, सांभर मसाला पाउडर और करी पाउडर शामिल है। इसी के साथ एवरेस्ट के फिश करी मसाला में कार्सिनोजेनिक पेस्टीसाइड होने का दावा किया गया है।

हांगकांग के खाद्य सुरक्षा केंद्र (सीएफएस) के एक प्रवक्ता ने कहा कि उल्लंघन करने वालों को 50,000 डॉलर का जुर्माना और छह महीने की जेल हो सकती है।

वहीं, अमेरिकी कस्टम अधिकारियों ने भी पिछले छह महीनों में लगभग 31% एमडीएच उत्पादों को खारिज कर दिया है। सिर्फ यही नहीं, केंद्र सरकार ने भी भारतीय मसालों की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद कई कदम उठाए हैं।

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