अगर आप मारुति सुजुकी की कार खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो आने वाले महीनों में आपको इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। देश की दिग्गज कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी अगले छह महीने के दौरान कारों की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। कंपनी के मुनाफे में गिरावट और कच्चे माल की बढ़ती लागत के बीच यह फैसला लिया जा सकता है।

मारुति सुजुकी का जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 27% गिरकर 2,410 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने करीब 3,300 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। कंपनी का तिमाही मुनाफा बाजार के अनुमानों से भी कम रहा।
हालांकि, इस दौरान कंपनी के कारोबार से होने वाली आय में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 26% बढ़कर 53,340 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके बावजूद खर्च में तेज बढ़ोतरी ने मुनाफे पर दबाव बनाया। कंपनी का कुल खर्च करीब 30% बढ़कर 50,600 करोड़ रुपये हो गया, जबकि कच्चे माल की लागत में सालाना आधार पर 48% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
छह महीने में बढ़ सकते हैं कारों के दाम-
मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी टेकुची ने तिमाही नतीजों के बाद संकेत दिया कि कंपनी अगले छह महीने में कारों की कीमतें बढ़ा सकती है। कंपनी सही समय पर कीमतों में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है, ताकि बढ़ती लागत के असर को कम किया जा सके और मुनाफे में सुधार हो।
खास बात यह है कि कंपनी सितंबर तिमाही के दौरान ही दो बार कारों की कीमतें बढ़ा चुकी है। इससे पहले कंपनी ने लागत में बढ़ोतरी का असर खुद झेलने और खर्च कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के चलते अब ग्राहकों पर इसका कुछ बोझ डालने की तैयारी है। फिलहाल कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगली बार कीमतें कितनी बढ़ाई जाएंगी और किन मॉडलों पर इसका असर पड़ेगा।
छोटी कारों और SUV की मांग मजबूत-
बढ़ती लागत के बावजूद मारुति सुजुकी की कारों की मांग मजबूत बनी हुई है। सितंबर तिमाही में छोटी कारों की बिक्री में सालाना आधार पर 35.9% की बढ़ोतरी हुई, जबकि SUV की बिक्री 68.2% बढ़ी। SUV की मांग सप्लाई से ज्यादा रहने के बीच कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 40.8% हो गई।
मारुति सुजुकी के शेयर का हाल-
तिमाही नतीजों के बाद 27 अक्टूबर को मारुति सुजुकी का शेयर 2.05% की तेजी के साथ 11,450 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले छह महीनों में शेयर करीब 13.40% और एक साल में 30.13% गिर चुका है। कंपनी के सामने अब बढ़ती लागत और मजबूत मांग के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। कीमतों में बढ़ोतरी से मुनाफे को सहारा मिल सकता है, लेकिन इसका ग्राहकों की खरीदारी पर क्या असर पड़ेगा, इस पर भी बाजार की नजर रहेगी।
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