शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर को एक बार फिर भारी बिकवाली देखने को मिली। ग्लोबल बाजारों में जारी तनाव के बीच अब घरेलू स्तर पर महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे का संकट निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। इसके चलते Nifty करीब 300 अंक टूटकर 7 अप्रैल के बाद पहली बार 22,900 के नीचे चला गया।

Sensex और Bank Nifty में भी करीब 1,000 अंकों तक की गिरावट देखने को मिली। बाजार में बढ़ी घबराहट का अंदाजा India VIX में करीब 13 फीसदी की तेजी से लगाया जा सकता है। महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति बाजार के लिए नया घरेलू जोखिम बनकर सामने आई है। राज्य के 358 तालुकों में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है, यानी करीब 74 फीसदी तालुके इस संकट की चपेट में हैं। सूखे का असर खेती, ग्रामीण मांग और महंगाई पर पड़ने की आशंका है।
सरकार की ओर से हालात का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजी जाएगी। महाराष्ट्र में राहत पैकेज की भी बात सामने आई है। सरकार के आकलन के बाद राहत से जुड़े कदमों पर फैसला हो सकता है। महाराष्ट्र में सूखे के कारण कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की चिंता है। अगर फसलों की पैदावार प्रभावित होती है, तो खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि बाजार में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके साथ ही कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचना भी भारतीय बाजार के लिए दबाव बढ़ाने वाला फैक्टर है।
सिर्फ घरेलू नहीं, ग्लोबल दबाव भी-
बाजार की गिरावट के पीछे केवल महाराष्ट्र का सूखा जिम्मेदार नहीं है। वेस्ट एशिया में तनाव, ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव तथा होर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की बॉन्ड यील्ड में तेजी तथा दक्षिण कोरिया की 3 साल की बॉन्ड यील्ड के चार साल के ऊपरी स्तर पर पहुंचने से भी ग्लोबल बाजारों पर दबाव बना है।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में?
बाजार की गिरावट व्यापक रही। IT को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में नजर आए। रेट-सेंसिटिव शेयरों पर खास दबाव रहा। सरकारी बैंकों का इंडेक्स करीब 3 फीसदी गिरा, जबकि Bank of Maharashtra, Bank of India, PNB और Union Bank जैसे शेयरों में करीब 5 फीसदी तक की गिरावट आई। Auto और Realty शेयर भी दबाव में रहे। Defense, Capital Market और Metal शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली।
कुल मिलाकर, इस समय भारतीय बाजार पर ग्लोबल तनाव, ऊंचे कच्चे तेल, बॉन्ड यील्ड और महाराष्ट्र-कर्नाटक में सूखे जैसे कई जोखिम एक साथ असर डाल रहे हैं। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर सरकार के राहत कदमों, महंगाई के आंकड़ों और ग्लोबल बाजारों के संकेतों पर रहेगी।
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