भारत में आज मार्च के रिटेल महंगाई (Retail Inflation) के आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिस पर देशभर के आम परिवारों और निवेशकों की नजरें टिकी हैं। ये आंकड़े तय करेंगे कि आने वाले समय में रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल, खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें केंद्रीय बैंक के लिए सबसे बड़ी सिरदर्द बनी हुई हैं।
बाजार इस बात पर गौर कर रहा है कि क्या महंगाई तय दायरे के भीतर रहती है। अगर आंकड़ों में गिरावट आती है, तो भविष्य में आपकी मंथली लोन EMI कम होने का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि खाने-पीने की चीजों के दाम घट-बढ़ रहे हैं, लेकिन निवेशकों को उम्मीद है कि कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) स्थिर रहेगी। शेयर और बॉन्ड मार्केट की मजबूती के लिए यह संतुलन बेहद जरूरी है।

मार्च CPI का असर: क्या खाने-पीने की चीजें होंगी सस्ती और क्या करेगा RBI?
रिटेल महंगाई को बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ खाने-पीने की चीजों (Food Inflation) का ही है। जानकारों का मानना है कि भीषण गर्मी और हीटवेव की वजह से जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ी हैं। इस मौसम में अक्सर टमाटर और प्याज जैसी सब्जियों के दाम में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। आरबीआई इन सभी पहलुओं पर बारीकी से नजर रख रहा है ताकि महंगाई की उम्मीदों को काबू में रखा जा सके।
| आर्थिक संकेतक (Economic Indicator) | बाजार का अनुमान (Expected Range) |
|---|---|
| हेडलाइन CPI महंगाई | 4.82 प्रतिशत से 4.91 प्रतिशत |
| फूड प्राइस इंडेक्स | 7.65 प्रतिशत से 8.25 प्रतिशत |
रिजर्व बैंक ने पिछले कई महीनों से रेपो रेट को स्थिर रखा है। बैंक के अधिकारी चाहते हैं कि महंगाई दर टिकाऊ तरीके से 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर नीचे आए। अगर मार्च के आंकड़ों में नरमी दिखती है, तो आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। इससे घर खरीदने वालों और कॉर्पोरेट कर्जदारों को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है।
ग्लोबल मार्केट के संकेत और RBI से बाजार की उम्मीदें
महंगाई के इन आंकड़ों पर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और रुपये की चाल का भी असर पड़ता है। अगर डॉलर मजबूत होता है, तो भारत के लिए आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है। सरकारी आंकड़े जारी होते ही बॉन्ड यील्ड में भी तेज प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। ट्रेडर्स अब केंद्रीय बैंक के रुख में संभावित बदलाव को देखते हुए अपनी रणनीति बना रहे हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई की मौजूदा रफ्तार ही इस साल भारत की आर्थिक दिशा तय करेगी। महंगाई कम रहने से लोग ज्यादा खर्च कर पाएंगे, जिससे देश की ओवरऑल ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। जैसे ही मंत्रालय की ओर से आधिकारिक आंकड़े जारी होंगे, हम आप तक सबसे पहले अपडेट पहुंचाएंगे। यह जानने के लिए हमारे साथ बने रहें कि इन आंकड़ों का आपके मंथली बजट पर क्या असर होगा।


Click it and Unblock the Notifications