नयी दिल्ली। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों (पीएसीबी) में से आधे से ज्यादा का निजीकरण करने की योजना बना रही है। सरकार का प्लान पीएसबी की संख्या घटा कर 5 करना है। एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत जल्द ये प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे पहले मोदी सरकार बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक में बहुमत हिस्सेदारी बेचेगी। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार सरकार सिर्फ 4-5 बैंक रखना चाहती है।
सरकार का मिशन प्राइवेटाइजेशन
कैश के संकट से जूझ रही मोदी सरकार बैंकों का विलय भी कर सकती है, जिसके बाद केवल 5 बैंक चालू रहेंगे। इसे पहले सरकार ने 2019 में दस पीएसबी को चार में मिला दिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि सरकार बिना विलय वाले पीएसबी को प्राइवेट बैंकों को बेच सकती है। हालांकि बढ़ते एनपीए और कोरोना के कारण प्रतिकूल बाजार स्थिति की वजह से इस योजना को अगले साल तक के लिए टाला जा सकता है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार मेगा प्राइवेटाइजेशन से कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी बेच सकती है। इनमें तेल और गैस, बैंकिंग, उर्वरक, बिजली, खदान, खनिज और बीमा शामिल हैं।
कौन सी यूनिट्स बची रह सकती हैं
सरकार देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, हाल ही में विलय किए गए बैंकों, एलआईसी, जीआईसी, पावरग्रिड और ओएनजीसी जैसी कुछ बड़ी कंपनियों में बहुमत हिस्सेदारी बनाए रखने की योजना बना रही है। मगर सरकार का प्लान बाकी कंपनियों को बेचने का है। सरकार के प्लान में ओएनजीसी और गेल जैसी बड़ी तेल कंपनियों द्वारा अन्य कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचा जाना शामिल है। इसका मतलब यह हो सकता है कि ओएनजीसी एचपीसीएल या जीएशपीसी में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर सकती हैं।
हर सेक्टर में 1 से 4 कंपनियां
सरकार हर क्षेत्र में 1 से 4 कंपनियां रख सकती है। इनमें तेल और गैस, बिजली, उर्वरक, कोयला, खान और खनिज, बैंक और बीमा शामिल हैं, जबकि गैर-सामरिक क्षेत्रों में सरकार की सभी कंपनियों को बेचने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार बीमा क्षेत्र में सरकार केवल दो कंपनियों एलआईसी और जीआईसी रखना चाहती है, जबकि बैंकिंग में सरकार का प्लान 12 से घटा कर इनकी संख्या आधा करने का है। सरकार नया इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए फंड का पुन: उपयोग करने के लिए संपत्तियों को बेचने पर भी ध्यान दे रही है। खनिज और कोयला खानों की नीलामी भी की जा सकती है। सरकार की योजना कम से कम 4-5 उर्वरक कंपनियों को बेचने की भी है। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग ने वर्तमान में 40 सरकारी विभागों से इस नीति के मसौदे पर टिप्पणी मांगी है और जल्द ही नीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
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