Piyush Pandey: एडवरटाइजिंग की दुनिया के दिग्गज पीयूष पांडे का शुक्रवार को निधन हो गया। फेविकोल, कैडबरी और एशियन पेंट्स के मशहूर विज्ञापनों के पीछे यह आदमी 70 साल के थे। पीयूश पांडे एक इन्फेक्शन से जूझ रहे थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा।

वह इंसान जिसे मॉडर्न इंडियन एडवरटाइजिंग को आकार देने का श्रेय दिया जाता है। क्रिएटिविटी को कल्चरल स्टोरीटेलिंग के साथ मिलाने के लिए जाने जाने वाले पांडे की विरासत उन यादगार कैंपेन के जरिए जिंदा है जो भारत की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए।
भारतीय एडवरटाइजिंग की आवाज
बता दें कि पीयूश पांडेय लगभग चार दशकों से एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में काम कर रहे थे। वह ओगिल्वी के वर्ल्डवाइड चीफ क्रिएटिव ऑफिसर और इंडिया के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन थे। पांडेय 1982 में ओगिल्वी से जुड़े और उन्होंने सनलाइट डिटर्जेंट के लिए अपना पहला विज्ञापन लिखा। छह साल बाद, वह कंपनी के क्रिएटिव डिपार्टमेंट में आ गए और फेविकोल, कैडबरी, एशियन पेंट्स, लूना मोपेड, फॉर्च्यून ऑयल और कई अन्य ब्रांड्स के लिए यादगार विज्ञापन बनाए।
उनकी लीडरशिप में, ओगिल्वी इंडिया को द इकोनॉमिक टाइम्स के किए गए एक इंडिपेंडेंट सर्वे, एजेंसी रेकनर में 12 सालों तक नंबर 1 एजेंसी का स्थान मिला। पांडेय ने कई अवॉर्ड जीते हैं, जिनमें पद्म श्री भी शामिल है, जो उन्हें 2016 में दिया गया था।
पीयूश पांडेय के स्लोगन
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के चुनाव अभियान के लिए बनाया गया उनका नारा अब की बार, मोदी सरकार भी एक बहुत मशहूर पॉलिटिकल कैचफ्रेज बन गया।
- कैडबरी के कुछ खास है
- एशियन पेंट्स के हर खुशी में रंग लाए
- अमिताभ बच्चन के साथ पोलियो विज्ञापन अभियान
- फेविकोल विज्ञापन अभियान - फेविकोल बस, फेविकोल मछली, फेविकोल सोफा
- फेविक्विक विज्ञापन अभियान जैसे तोड़ो नहीं, जोड़ो
- गूगली वूगली वूश- पॉन्ड्स विज्ञापन
- चल मेरी लूना
- कैडबरी डेयरी मिल्क विज्ञापन अभियान जैसे कुछ खास है
- वोडाफोन विज्ञापन अभियान- पग, जूजूज
- एशियन पेंट्स विज्ञापन अभियान जैसे हर घर कुछ कहता है
- भारतीय पर्यटन के लिए अभियान
- बेल बजाओ विज्ञापन अभियान
- कैंसर पेशेंट एसोसिएशन के लिए धूम्रपान विरोधी अभियान
- रथ वनस्पति
- फॉर्च्यून तेल
- गूगल- रीयूनियन


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