नई दिल्ली। शेयर बाजार में शुक्रवार यानी 13 मार्च 2020 को सुबह शेयर बाजार खुलते ही लोअर सर्किट लगने के चलते कारोबार रोक दिया गया। ऐसा शेयर बाजार में बहुत ही कम होता है। आमतौर पर यह शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। आज काफी साल के बाद शेयर बाजार में लोअर सर्किट लगा है। आज जैसे ही निफ्टी 959 अंक गिरा लोअर सर्किट लग गया और शेयर बाजार में कारोबार 45 मिनट के लिए रोक दिया गया।
13 मार्च 2020 को लोअर सर्किट का स्तर
-10 फीसदी गिरावट यानी 959.00 अंक
-15 फीसदी यानी 1438.50 अंक
-20 फीसदी यानी 1918.05 अंक
शेयर बाजार में 2 तरह के होते हैं सर्किट
शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर 2 तरह के होते हैं। एक होता है अपर सर्किट और दूसरा होता है लोअर सर्किट। अपर सर्किट शेयर बाजार में तब लगता है जब यह एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है। देश में सेबी ने अपर सर्किट के लिए 3 सीमाएं तय की हैं। ये हैं 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी की। वहीं जब शेयर बाजार एक तय सीमा से ज्यादा गिरने लगता है तो लोअर सर्किट लगया जाता है। सेबी ने इसके लिए भी 10 फीसदी, 15 फीसदी और 20 फीसदी की सीमा तय की है। शेयर बाजार के एक सीमा से ज्यादा बढ़ने या गिरने पर सर्किट ब्रेकर लगाने की शुरुआत देश में सेबी ने 2001 में की थी। इसका उदृदेश्य शेयर बाजार में भारी उतार चढ़ाव को रोकना होता है।
निफ्टी में सर्किट लगने के नियम
शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर लगाने का भी एक नियम है। एनएसई की बेवसाइट के अनुसार अगर दोपहर 1 बजे के पहले शेयर बाजार 10 फीसदी बढ़े या गिरे तो सर्किट ब्रेकर के तहत अपर सर्किट या लोअर सर्किट लगाया जाता है। ऐसी स्थिति में ट्रेडिंग को 45 के लिए रोका जाता है। लेकिन अगर 1 बजे के बाद 10 फीसदी उतर चढ़ाव दर्ज किया जाता है तो कारोबार को केवल 15 मिनट के लिए ही रोका जाता है। इसी प्रकार 15 और 20 फीसदी के लिए भी नियम हैं। सर्किट ब्रेकर के बारे में और जानकारी के लिए एनएसई की वेबसाइट पर
https://www.nseindia.com/products/content/equities/equities/circuit_breakers.htm जाकर जानकारी ली जा सकती है।
जानिए सर्किट व्यवस्था का इतिहास
-भारत में सेबी ने 28 जून 2001 में सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) की व्यवस्था लागू की
-देश के शेयर बाजार के इतिहास में पहली बार सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल 17 मई 2004 को हुआ। इस दिन दो बार सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) लगाया गया।
-इसके बाद सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल 22 मई 2006 को हुआ। इस दिन शेयर बाजार में लोअर सर्किट (Lower circuit in the stock market) लगाया गया।
-इसके बाद सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल 17 अक्टूबर 2007 को किया गया। इस दिन भी शेयर बाजार में लोअर सर्किट (Lower circuit in the stock market) लगा।
-इसके बाद 22 जनवरी 2008 को शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर (circuit breakers) का इस्तेमाल हुआ।
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