Lord Jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदूओं के लिए धार्मिक महत्व वाला उत्सव है। ओडिशा के पुरी शहर के जगन्नाथ मंदिर से हर साल प्रभु जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ यात्रा पर निकलते हैं।

पुरी की मशहूर रथ यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकालती है। इस साल 7 जुलाई को ओडिशा में विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन होगा और इसको लेकर सभी तैयारियां जारी हैं। इस आयोजन को लेकर सरकार की तरफ से विशेष तैयारियां की गई हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को घोषणा की कि आगामी रथ यात्रा के लिए कई व्यवस्थाएं की गई है।
रेल मंत्रालय भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित एक होल्डिंग एरिया स्थापित कर रहा है। आइए इसके बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैं।
रथ यात्रा के लिए की गई है पूरी तैयारी
आगामी रथ यात्रा के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। इससे पहले उन्होंने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के श्रद्धालुओं को भी आश्वासन दिया था कि ओडिशा तक उनकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए 315 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।
आरामदायक सफर की मिलेगी सुविधा
जगन्नाथ जी को देखने के लिए हर वर्ष लाखों भक्तों का समागम जगन्नाथ धाम में होता है, जिसकी तैयारी अब युद्ध स्तर पर चल रही है। 15,000 लोगों के लिए एक होल्डिंग एरिया बना रहा है , जिसमें उचित शौचालय सुविधाएं और अस्थायी टिकटिंग केंद्र होंगे। अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी है कि इसका लक्ष्य भक्तों के लिए एक सुगम और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ओडिशा के 25 जिलों से आने वाले अनुमानित 15 लाख भक्तों के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
भीड़ प्रबंधन
सुविधा और सुरक्षा का मानक आयोजन बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। अब तक हुई तैयारियों की समीक्षा की गई है और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। लोगों की बड़ी सभाओं की योजना बनाने, उन्हें संगठित करने और निगरानी करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है।
22 जून को हुआ स्नान पूर्णिमा
इससे पहले 22 जून को पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर में हजारों श्रद्धालु 'स्नान पूर्णिमा' मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। इस त्यौहार में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों को स्नान मंडप में 108 घड़ों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद देवताओं को भगवान गणेश के समान दिखने वाले गजानन बेशा से सजाया गया, जो भव्य रथ यात्रा जुलूस से पहले एक दुर्लभ सार्वजनिक उपस्थिति को दर्शाता है।
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