नयी दिल्ली। लॉकडाउन के कारण जो तबका सबसे अधिक प्रभावित हुआ या हो रहा है वो है प्रवासी मजदूर। एक शहर या राज्य के मजदूर दूसरी जगहों पर फंसे हुए हैं। कई खबरें सामने आई जिनमें ऐसे मजदूर कई तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं। मगर ऐसे समय जब प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान शिलांग जैसे दूर-दराज इलाकों में फंसे हुए हैं तो हाथ में पीओएस मशीन और आधार-प्रमाणित पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करने वाले डाककर्मियों ने सुनिश्चित किया कि उन्हें उनके डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर पैसे मिलते रहें। डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर सरकार की तरफ से भेजा जाने वाला पैसा है, जो विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है। मगर समस्या है ये है कि लॉकडाउन के बीच दूर-दराज वाले इलाकों में पैसा निकाल पाना भी मुश्किल है। ऐसे में लाभार्थियों के लिए काम पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों ने किया।
शानदार रही है पोस्ट ऑफिस कर्मियों की भूमिका
पोस्ट ऑफिस कर्मचारियों ने पेंशनभोगियों को उन्हें मिलने वाले पैसे और बैंकिंग सेवाओं के साथ ही जीवन रक्षक दवाइयां, अस्पतालों को पीपीई किट भी पहुंचाई। इसके लिए इंडिया पोस्ट ने अपने विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल किया ताकि बिना रुके जरूरी सामानों और पैसों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उनका ये योगदान कोरोना महामारी के भयावह प्रभाव से निपटने के लिए है। इंडिया पोस्ट यह ब्लू-डार्ट कार्गो उड़ानों से लेकर रेलवे द्वारा चलाई जा रही विशेष पार्सल ट्रेनों तक, परिवहन सिस्टम्स का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा विभाग द्वारा तैनात किए गए 1,000 एटीएम बैंकिंग सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए काम में आए हैं। साथ ही माइक्रो एटीएम से लैस 3 लाख ग्रामीण डाक सेवक देश दूरस्थ हिस्सों में फैले हुए है और घर घर तक पैसे पहुंचा रहे हैं।
लाखों पार्सल पहुंचाए गए
आंकड़ों के मुताबिक 24 मार्च से 13 अप्रैल के बीच 14 लाख स्पीड पोस्ट बुक किए गए, 2.43 पार्सल के लिए इंडिया पोस्ट का इस्तेमाल किया गया और 11 लाख इलेक्ट्रॉनिक मनी ऑर्डर आए। 24 मार्च से 15 अप्रैल तक 1.3 लाख बैंकिंग लेन-देन हुई, जिनका कुल मूल्य 21000 करोड़ रुपये। करीब 1 लाख आधार आधारित लेन-देन हुईं और गरीबों तथा जरूरतमंदों को 10 करोड़ रु उनके घर के दरवाजे तक पहुंचाए गए। एक अधिकारी के अनुसार जब लॉकडाउन की घोषणा की गई, तो इस बात की आशंका थी कि हमारे परिचालन में बाधा आएगी, लेकिन विभाग ने खुद को फिर से मजबूत किया और लोगों की सहायता करने की तैयारी की।
सरकार ने किया खास ऐलान
केंद्र सरकार ने ड्यूटी पर तैनात सभी डाक कर्मचारियों को कोरोनावायरस से मौत के मामले में 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है। संचार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मौजूदा स्थिति के मद्देनजर ग्रामीण डाक सेवकों सहित सभी डाक कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनाती के दौरान कोरोना से मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इस मामले में सरकार के दिशानिर्देश तुरंत प्रभाव में आ जाएंगे और कोरोना संकट समाप्त होने तक पूरी अवधि के लिए जारी रहेंगे।
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