नयी दिल्ली। मार्च में भारत की पेट्रोल बिक्री में 17.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी। साथ ही डीजल की मांग में भी लगभग 26 फीसदी की कमी देखने को मिली। दरअसल देशव्यापी लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था थम गई है, जिससे ईंधन की मांग बुरी तरह प्रभावित हुई है। पेट्रोल-डीजल के अलावा उड़ानों के बंद या निलंबित होने से विमानन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की बिक्री में भी 31.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी। मार्च में पेट्रोल की बिक्री घट कर 19.43 लाख टन, डीजल की बिक्री 25.9 फीसदी घट कर 49.82 लाख टन और एटीएफ की बिक्री गिर कर 4.63 लाख टन रह गई। बता दें कि मार्च ढाई साल में पहला महीना है जब पेट्रोल की बिक्री में गिरावट देखी गई। वैसे वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 11 महीनों के दौरान ईंधन में 8.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी।

एलपीजी की मांग बढ़ी
हालांकि मार्च में एलपीजी की मांग बढ़ी। बल्कि एलपीजी इकलौता ईंधन रहा, जिसकी मांग में बढ़ोतरी देखी गई। इसका मुख्य कारण है लोगों द्वारा लॉकडाउन के चलते हड़बड़ी में सिलेंडर बुक किए। मार्च में एलपीजी की सेल्स 1.9 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 22.86 लाख टन रही। ये तीन सरकारी क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों के आंकड़े हैं, जिनमें इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम कॉर्प और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प शामिल हैं। प्राइवेट क्षेत्र की कंपनियों द्वारा बिक्री को शामिल करने के बाद मार्च के पूरे आंकड़े अगले कुछ दिनों में सामने आएंगे।
अप्रैल में भी हल्का रहेगा फ्यूल मार्केट
इंडस्ट्री अधिकारियों के मुताबिक ईंधन की खपत अप्रैल में भी कम रहेगी, क्योंकि लॉकडाउन महीने के मध्य तक चलेगा। ऐसे संकेत भी हैं कि लॉकडाउन हटने के बाद भी आंशिक प्रतिबंध जारी रहेगा। हालांकि फिर भी लॉकडाउन खत्म होने के बाद सेल्स में बढ़ोतरी की उम्मीद है, क्योंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर प्रतिबंध हटा दिया जाएगा। अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 तक डीजल की खपत में 1.1% की वृद्धि देखी गई है। इस साल फरवरी में इसकी मांग बढ़ी, जबकि जनवरी में इसकी सेल्स घटी थी। एलपीजी की खपत फरवरी के दौरान 4.3 की गिरावट आई, जबकि अप्रैल-फरवरी में 6.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।


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