नयी दिल्ली। कोरोनावायरस को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लगाए गए लॉकडाउन से करोड़ों लोगों की नौकरियों और रोजगार पर असर पड़ा है। बड़ी बड़ी दिग्गज कंपनियों का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कंपनियों पर जो असर पड़ रहा है वो उसका कुछ बोझ अपने कर्मचारियों पर भी डाल रही हैं। कंपनियों की तरफ से बाकयदा मेल करके कर्मचारियों के वेतन काटे जाने की जानकारी दी जा रहा है। हालांकि सरकार ने कंपनियों से कहा था कि वे अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती न करें और न ही उन्हें नौकरी से निकालें। मगर सरकार को वेतन काटे जाने की सूचना मिल रही है। इसीलिए सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जिन्होंने अपने कर्मचारियों की सैलेरी काटी है।

इन पर कसेगा शिकंजा
बैंकिंग, बीमा, सरकारी कंपनियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रही वे फर्म्स जो लॉकडाउन के दौरान मार्च का पूरा वेतन नहीं दे रहीं ऐसी कंपनियों पर केंद्र सरकार कार्रवाई करेगी। इस मामले में केंद्रीय मंत्रालय की तरफ से बकायदा केंद्रीय श्रमायुक्त को सेंट्रल गवर्मेंट के तहत आने वाली कंपनियों के खिलाफ आई शिकायतों पर कार्रवाई का आदेश भी दे दिया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय के पास कर्मचारियों यूनियनों के साथ ही कुछ व्यक्तिगत कर्मचारियों की भी शिकायतें पहुंची हैं। इन शिकायतों में बताया गया है कि कई कर्मचारियों को मार्च का वेतन या तो नहीं दिया गया या फिर एक हफ्ते का वेतन काटा जा रहा है। इस वेतन को देर से दिए जाने को कहा जा रहा है।
प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां कर रहीं गड़बड़
जानकारी के लिए बता दें कि बैंकिंग, बीमा, सरकारी कंपनियों के साथ ही रेलवे, पोर्ट, खदान, तेल क्षेत्र, एयरलाइन और एयरपोर्ट, सीमेंट, पेट्रोलियम से संबंधित यूनिट्स और केंद्रीय सरकारी कंपनियां केंद्र सरकार के अंतर्गत आती हैं। ये कंपनियां तो कर्मचारियों को मार्च की पूरी सैलेरी दे रही हैं। मगर इनके साथ बहुत सी प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां भी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करती हैं, जो कर्मचारियों को पूरा मार्च वेतन देने में आनाकानी कर रही हैं। दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों में हर महीने की 10 तारीख तक वेतन दे दिया जाता है। मगर लॉकडाउन की वजह से मार्च का वेतन 15 अप्रैल तक दिए जाने की छूट दी गई है। मगर यदि इसके बाद भी शिकायत मिली तो कंपनी पर कार्रवाई हो सकती है।
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