नयी दिल्ली। एक नये सर्वे में खुलासा हुआ है कि लॉकडाउन के दौरान कंपनियों की इनकम में 25 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। अधिकतर हाई-रैंकिंग बिजनेस मैनेजर्स का कहना है कि कॉर्पोरेट इनकम में लॉकडाउन की वजह से पहले ही 25 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। इतना ही नहीं सर्वे में अधिकतर प्रबंधकों ने ये भी कहा कि व्यापारों को नॉर्मल होने में एक साल का समय लगेगा। ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट प्रोवाइडर स्क्रिपबॉक्स द्वारा किए गए सर्वे को 'COVID-19 and Your Wealth' नाम दिया गया है। सर्वे में लॉकडाउन से कंपनियों की इनकम और नौकरियों के नुकसान के बारे में भी बताया गया है। सर्वे में शामिल लगभग 67 प्रतिशत टॉप बॉस, व्यापार मालिकों और संस्थापकों ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान कंपनी की इनकम में 25 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
नॉर्मल होने में लगेगा 1 साल से ज्यादा समय
सर्वे में शामिल अधिकतर मैनेजर्स ने कहा कि कारोबार 2021 तक सामान्य हो जाएगा, जबकि 22 प्रतिशत ऐसे लोग रहे जिनका मानना है कि लॉकडाउन समाप्त होने पर भी कारोबार नॉर्मल होने में एक साल से अधिक समय लगेगा। 1 से 15 मई 2020 के दौरान स्क्रिपबॉक्स ने ग्राहकों के साथ ये सर्वे ऑनलाइन किया। सर्वेक्षण में लगभग 1,200 उत्तरदाताओं ने भाग लिया। इनमें से 54 प्रतिशत बड़ी कंपनियों, 32 प्रतिशत छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों में (एमएसएमई) और 14 प्रतिशत स्टार्टअप्स में काम करते हैं।
कितनों की गई जॉब
लगभग 90 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अपनी कंपनी 25 प्रतिशत से कम लोगों को नौकरी खोते देखा, जबकि शेष 10 प्रतिशत ने कहा कि उनकी कंपनी में 25 प्रतिशत से अधिक लोगों की नौकरी गई। इनमें एमएसएमई में नौकरियों का नुकसान अधिक हुआ है। सर्वे के अनुसार फ्रीलांसर्स लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उनमें से 66 प्रतिशत ने अपनी इनकम में 25 प्रतिशत से अधिक कमी की जानकारी दी है। इनमें से 35 प्रतिशत की इनकम पूरी तरह बंद हो गई। बता दें कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों की भी भारी संख्या में नौकरी गई है।
बेरोजगारी दर 20 फीसदी से अधिक
सीएमआईई की एक ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लॉकडाउन में राहत के बावजूद भारत में बेरोजगारी घटने का नाम नहीं ले रही है। लॉकडाउन के बीच भारत में बेरोजगारी की दर 20 प्रतिशत से ऊपर बरकरार है। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार 17 मई को समाप्त सप्ताह के लिए बेरोजगारी दर 24.01 प्रतिशत थी, जबकि एक सप्ताह पहले ये 23.97 प्रतिशत थी। यानी बेरोजगारी दर बढ़ी है। हालांकि श्रम भागीदारी दर (Labour Participation Rate) में इजाफा हुआ है। 26 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के लिए श्रम भागीदारी दर 35.4 प्रतिशत थी, जो अब 38.8 प्रतिशत है।
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