नई दिल्ली। देश में जब कोनोना महामारी फैली थी, उस वक्त भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ा फैसला लेते हुए लोन लेने वालों को काफी राहत दी थी। आरबीआई ने बैंकों को सलाह दी थी कि वह आवेदन करने वालों से लोन की किस्त की वसूली रोक दे। इस राहत का देश में लाखों लोन लेने वालों ने फायदा उठाया था। लेकिन अब इस लोन की किस्त में मिली यह राहत खत्म होने का समय आ गया है। आरबीआई ने यह राहत 31 अगस्त 2020 तक ही दी थी। इस प्रकार अब 1 सितंबर 2020 से लोगों को अपने लोन की पूरी किस्त भरनी पड़ेगी। ऐसा इसलिए है कि अभी तक आरबीआई ने लोन की किस्त न भरने की छूट को बढ़ाया नहीं है। ऐसे में आइये जानते यह पूरा मामला क्या है और आप कैसे प्रभावित होंगे।
1 सितंबर 2020 से देनी होगी लोन की पूरी किस्त
वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने बैंकों से लोन लेने वालों को किस्त जमा करने में छूट यानी मोरेटोरियम योजना का घोषणा की थी। यह मोरेटोरियम योजना पहले 3 महीने के घोषित की गई थी, जिसे बाद में 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था। अब यह बढ़े हुए 3 माह की अवधि भी 31 अगस्त 2020 को खत्म हो रही है। ऐसे में यह तय नहीं हो पा रहा है कि लोन मोरेटोरियम स्कीम आगे बढ़ेगी या नहीं? जहां तक आरबीआई की बात है तो उसने अभी तक इस पर कोई बयान नहीं दिया है। ऐसे में लोगों को 1 सितंबर 2020 से अपने लोन की पूरी किस्त भरना पड़ेगी।
जानिए लोन मोरेटोरियम पर आरबीआई गवर्नर की राय
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बीते दिन एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बताया थाा कि लोन मोरेटोरियम लॉकडाउन के दौरान लोगों को राहत देने के लिए सरकार और आरबीआई का एक कदम था। इसके अलावा लोन मोरेटोरियम को एक समय की देना संभव होता है।
बैंकों नहीं चाहते लोन मोरेटोरियम को बढ़े
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के अनुसार महामरी की रोकथाम के बाद देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती के रास्ते पर लाने के लिए आगे बढ़ना होगा। वित्तीय क्षेत्र को सामान्य स्थिति में लौटना चाहिए। आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह से यह नहीं मानना चाहिए कि आरबीआई उपायों को जल्द हटा लेगा। हालांकि एसबीआई, एचडीएफसी, पीएनबी सहित कई बैंकों ने मांग की थी कि लोन मोरेटोरियम को आगे न बढ़ाया जाए।
बैंक चाहें तो दे सकते हैं राहत
लोन मोरेटोरियम पर अगर सरकार और आरबीआई आगे बढ़ाने की घोषणा नहीं करते हैं, तब भी बैंक ऐसा अपने आप कर सकते हैं। लेकिन यह बैंकों पर निर्भर करेगा। लोन की किस्त न मिलने से बैंकों का कैश फ्लो भी प्रभावित हो रहा है। क्यों कि बैंक को अपने लोन की किस्त समय पर नहीं मिलेगी तो पूरा बैंकिंग सिस्टम ही बैठ जाएगा, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी बुरा होगा। हालांकि जानकारी के अनुसार बैंक जिन विकल्प पर बैंक विचार कर रहे हैं, उसमें होम लोन को कुछ महीने के लिए बंद करने या 2 साल तक मौजूदा किस्त को कम करने का विकल्प दिया जा सकता है।


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