नयी दिल्ली। आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) के साथ बैठक की। इसमें वित्त मंत्री ने सभी बैंकों को निर्देश किया है कि वे कर्जदाता कर्जदारों का सपोर्ट करें। उन्होंने बैंकों से 15 सितंबर तक रेजोल्यूशन स्कीम भी शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा कि लेनदारों को जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर मीडिया अभियान चलाना चाहिए। सीतारमण ने उधारदाताओं को यह सुनिश्चित करने के भी सलाह दी कि रेजोल्यूशन फ्रेमवर्क पर नियमित रूप से अपडेट किए गए एफएक्यू अपनी (उधारदाताओं) वेबसाइटों पर अपडेट करें। वित्त मंत्री के अनुसार एफएक्यू को जानकारी को हिंदी और इंग्लिश के अलावा बाकी क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपडेट किया जाए। वेबसाइट के अलावा एफएक्यू को बैंकों को ऑफिसों और शाखाओं में सर्कुलेट किया जाए।

इन 2 बिंदुओं पर रहा फोकस
बैंक और एनबीएफसी के प्रमुखों के साथ अपनी वर्चुअल बातचीत के दौरान निर्मला सीतारमण ने दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें पहला है कि रेजोल्यूशन के लिए कर्जदाता तुरंत बोर्ड की तरफ से पास की गई पॉलिसी पेश करें, योग्य कर्जदाताओं की पहचान करें और उनसे संपर्क करें। दूसरा हर बेहतर क्षमता वाले कारोबार को कर्जदाताओं द्वारा एक रेजोल्यूशन प्लान को तुरंत लागू किया जाए। इस बीच बैंकों ने वित्त मंत्री को आश्वस्त किया कि वे अपने रेजोल्यूशन पॉलिसियों के साथ तैयार हैं और योग्य कर्जदारों को पहचानने और उन तक पहुंचने की प्रोसेस शुरू कर दी गई है।
आरबीआई के साथ बातचीत जारी
बैंकों की तरफ से ये भी कहा गया है कि वे भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा निर्धारित समयसीमा का पालन करेंगे। वित्त मंत्रालय भी यह सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई के साथ बातचीत कर रहा है कि ऋणदाताओं को रेजोल्यूशन प्रोसेस में आरबीआई द्वारा सहायता प्रदान की जाए। सीतारमण ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम, पार्शियल क्रेडिट गारंटी स्कीम 2.0 और सब-ऑर्डिनेट डेब्ट स्कीम्स के तहत विभिन्न कर्जदाताओं द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की।


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