नयी दिल्ली। पेड़ हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है। पेड़ों से ही कार्बन को कम करने में मदद मिलती है। पेड़ लगाने और संरक्षित करने के लिए केरल के एक गांव में एक खास योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत किसानों को ब्याज मुक्त बैंक लोन के बदले में अपनी जमीन पर पेड़ गिरवी रखने होते हैं। पेड़ों की संख्या बढ़ाने के लिए इस खास की योजना शुरुआत की गई है। ये खास योजना राज्य के वित्त मंत्री टीएम थॉमस इसाक के दिमाग में आई थी, जिसे हाल ही में लॉन्च कर दिया गया है। पेड़ गिरवी रख कर लोन वाली ये योजना वायनाड जिले के मीनांगडी पंचायत में शुरू हुई है, जिसमे 33 हजार लोग हैं। ट्री बैंक में एक किसान को 5,000 रु का चेक देकर इस योजना का शुभारंभ किया गया।
2 साल पहले हुआ था ऐलान
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस योजना का ऐलान फरवरी 2018 में किया गया था। तब इसाक पेरिस में हुए पर्यावरण पर एक सम्मेलन में भाग लेकर लौटे थे। उन्होंने वायनाड जिले की मीनांगडी पंचायत में इस योजना की फॉर्मेट तैयार किया था। इस योजना के लिए केरल सरकार ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के साथ भागीदारी की।
कैसे मिलेगा लोन
योजना के तहत हर पेड़ को 10 साल की अवधि के लिए 50 रुपये प्रति सालाना के हिसाब से गिरवी रखा जा सकता है। इसलिए अगर कोई किसान अपनी जमीन पर 100 पेड़ लगाता है तो बैंक उसे कर्ज के रूप में 10 साल के लिए 5000 रुपये प्रति वर्ष देगा। योजना में लोन के ब्याज का भुगतान पंचायत द्वारा किया जाता है। किसान को सिर्फ मूल राशि का भुगतान करना होता है। ये मूल राशि भी तब लौटानी होगी अगर वे पेड़ काटने का फैसला करता है। यदि वह पेड़ नहीं काटने का विकल्प चुनता है तो लोन चुकाने की जरूरत नहीं।
राज्य सरकार ने दिए 10 करोड़ रु
राज्य सरकार ने मीनांगडी सेवा सहकारी बैंक में परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये का स्पेशल फंड जमा किया है, जिसका उपयोग लोन बांटने के लिए किया जाता है। अभी तक पंचायत के 2 वार्डों में 184 किसानों को लोन दिया गया है। पिछले दो वर्षों में पंचायत ने अपनी मनरेगा नर्सरी के माध्यम से प्राइवेट प्लांटेशन पर लगभग 1.57 लाख पौधे लगाए हैं। ट्री बैंकिंग योजना के अनुसार पंचायत पहले तीन सालो के लिए पौध की देखभाल में मदद करेगी, जिसके बाद इसकी जिम्मेदारी किसानों की होगी।
इन फलों के पेड़ लगेंगे
पंचायत ने पेड़ों की 34 प्रजातियों को लिस्ट किया है जो किसान अपनी भूमि पर लगा सकते हैं। इनमें आम, कटहल और देवदार शामिल हैं। सागौन और भारतीय शीशम जैसी चीजें इस परियोजना से बाहर हैं। फलों के पेड़ों के बड़े पैमाने पर रोपण के जरिए पंचायत को भी आत्मनिर्भर होने की उम्मीद है। यहां तक कि भविष्य में ये जगह फ्रूट-प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का गढ़ भी बन सकती है।
फार्मिंग सेक्टर को नुकसान से घटे पेड़
वायनाड में कृषि क्षेत्र के पतन के कारण किसान छोटे पेड़ों को काटने और बेचने के लिए तैयार हैं। इस परियोजना के माध्यम से कम से कम अस्थायी रूप से किसानों को अपने पेड़ों की सुरक्षा के लिए फाइनेंशियल मदद मिलेगी। इससे भी जरूरी बात यह है कि क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को घटाने के जरूरी और लंबी अवधि के टार्गेट को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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