नयी दिल्ली। सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का एनपीए यानी फंसे हुए लोन लगातार बढ़ रहे हैं। खास कर पिछले 5 सालों में एलआईसी के एनपीए में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान एलआईसी के फंसे हुए लोन दोगुने होकर 30000 करोड़ रुपये पर पहुँच गये। इसके लिए अनिल अंबानी ग्रुप सहित कई कंपनियां जिम्मेदार हैं। अनिल अंबानी ग्रुप की कई कंपनियों के अलावा दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड या डीएचएएफएल और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग में एलआईसी का काफी एक्सपोजर यानी लोन फंसा हुआ है। ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि प्राइवेट कारोबारियों को लोन देने पर एलआईसी की हालत बैंकों जैसी ही है, जिससे इसका एनपीए रेशियो 2019-20 की अप्रैल-सितंबर छमाही में 6.10 फीसदी रहा। यही हाल यस बैंक, एक्सिस और आईसीआईसीआई बैंक का भी है। एक समय प्राइवेट बैंकों के एनपीए काफी कम थे, मगर चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के कारण इनके एनपीए में वृद्धि हुई।
कितना है LIC का NPA
बता दें कि अनिल अंबनी ग्रुप और डीएचएफएल को लोन देना एलआईसी को भारी पड़ा। एलआईसी ने 2018-19 के लिए संदिग्ध एसेट्स के लिए प्रोविजनिंग 30 फीसदी बढ़ा कर 23,760 करोड़ रुपये कर दी थी, जिसे सितंबर 2019 तक के लिए बढ़ा कर 30000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी का यह लोन डूब भी सकता है। एलआईसी ने कुछ दिन पहले पेश की गयी अपनी रिपोर्ट में प्रोविजन बढ़ाने का फैसला एसेट क्वालिटी और रियल एस्टेट, लोन और अन्य संपत्तियों में निवेश के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद लिया।
बैंकों वाले ही हैं बड़े डिफॉल्टर
खास बात यह है कि एलआईसी का पैसा उन्हीं कंपनियों में फंसा हुआ है, जिनमें बैंकों का। इन कंपनियों में डेकन क्रोनिकल, एस्सार पोर्ट, गैमन, आईएलऐंडएफएस, भूषण पावर, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, आलोक इंडस्ट्रीज, एमट्रैक ऑटो, एबीजी शिपयार्ड, यूनिटेक, जीवीके पावर और जीटीएल शामिल हैं। एलआईसी का लोन इन कंपनियों में दो तरीकों से फंसा है, जिनमें सावधि कर्ज और डिबेंचरों के जरिये निवेश शामिल है। इन डूबती कंपनियों में से एलआईसी को बहुत अधिक मिलने की संभावना नहीं है। बल्कि सालाना 2600 करोड़ रुपये से अधिक मुनाफा कमाने वाली एलआईसी डिफॉल्टिंग मामलों में 90 फीसदी से अधिक प्रोविजन बना चुकी है।
कैसी है बैंकों की हालत
बैंकों की हालत देखें तो 2019-20 की जुलाई-सितंबर तिमाही में यस बैंक का एनपीए अनुपात 7.39 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक का एनपीए अनुपात 6.37 फीसदी और एक्सिस बैंक का एनपीए अनुपात 5.03 फीसदी रहा। कुछ दिन पहले आरबीआई की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि सितंबर 2019 में 24 बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 5 फीसदी से कम था, जबकि 4 बैंक ऐसे रहे जिनका यही अनुपात 20 फीसदी से भी अधिक था। इस लिहाज से सितंबर 2020 तक सरकारी बैंकों की सकल एनपीए अनुपात 13.2 फीसदी, निजी बैंकों का 4.2 फीसदी और विदेशी बैंकों का 3.1 फीसदी तक पहुँच सकता है।
यह भी पढ़ें - अनिल अंबानी से डरी LIC, हजारों करोड़ डूबने का खतरा
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