नई दिल्ली, अप्रैल 27। भारतीय जीवन बीमा निगम का बहुप्रतीक्षित आईपीओ या आरंभिक सार्वजनिक पेशकश, 4 मई (एंकर निवेशकों के लिए 2 मई) आम जनता के लिए खुलेगा और 9 मई को बंद होगा। एलआईसी के अधिकारियों ने बुधवार दोपहर प्रेस वार्ता में कहा शेयर की लिस्टिंग स्टॉक एक्सचेंजों पर होगी 17 मई को होगी। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। सरकारी बीमा कंपनी के आईपीओ में शेयरों का प्राइस बैंड 902 रु और 949 रु प्रति शेयर होगा। आईपीओ में 22.13 करोड़ से अधिक शेयर बेचे जाएंगे। कुल आईपीओ मूल्य 21,000 करोड़ रु निर्धारित किया गया है। इसके पॉलिसीधारकों को आईपीओ में 60 रु प्रति शेयर की छूट मिलेगी और रिटेल कर्मचारियों और एंकर निवेशकों को 45 रु प्रति शेयर की छूट मिलेगी।
पॉलिसीधारकों के लिए रिजर्व होंगे शेयर
एलआईसी पॉलिसीधारकों के लिए आईपीओ में 10 फीसदी शेयर आरक्षित होंगे। जबकि कर्मचारियों के पास ऑफर में पांच फीसदी शेयर रिजर्व होंगे। एलआईसी ने कहा कि वे पॉलिसीधारक जिनके पास डीआरएचपी (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) और बोली/प्रस्ताव, आईपीओ खुलने की तारीख के अनुसार एक या एक से अधिक एलआईसी पॉलिसी हो, और भारत के निवासी हों, वे पॉलिसीधारक रिजर्व शेयरों के तहत आवेदन करने के पात्र होंगे।
अधिकतम निवेश की लिमिट
एलआईसी के पात्र कर्मचारी 'एम्प्लॉई रिजर्वेशन' के तहत आवेदन कर सकते हैं। इस योजना के तहत बोली 2 लाख रुपये या कुल प्रस्ताव के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। कुल मिलाकर लगभग 15.81 लाख शेयर कर्मचारियों के लिए आरक्षित किए गए हैं और लगभग 2.21 करोड़ शेयर पॉलिसीधारकों के लिए आरक्षित किए गए हैं। सामान्य निवेशक 'क्वालिफाइड इंस्टिट्यूशनल बायर्स' (क्यूआईबी) सेगमेंट और रिटेल पोर्शन में आवेदन कर सकते हैं।
क्यूआईबी के लिए 9.88 करोड़ से अधिक शेयर
क्यूआईबी के लिए 9.88 करोड़ से अधिक शेयर और गैर-संस्थागत खरीदारों के लिए 2.96 करोड़ से अधिक शेयर आरक्षित किए गए हैं। सरकार की योजना पिछले ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में पांच प्रतिशत के बजाय 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की है। सरकार पहले 31.6 करोड़ शेयर बेचना चाहती थी।
21000 रु का आईपीओ
संशोधित डीआरएचपी पिछले सप्ताह बाजार नियामक के सामने प्रस्तुत किया गया था। सरकार, जो पूरी तरह से बीमा दिग्गज की मालिक है, ने लगभग 22 करोड़ शेयर बेचकर 21,000 करोड़ रुपये की राशि जुटाने की योजना बनाई है जो कि एलआईसी की 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। 21,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के जरिए सरकार बीमा कंपनी के 6 लाख करोड़ रुपये के वैल्युएशन का लक्ष्य है। आईपीओ से संबंधित पिछले ड्राफ्ट पेपर फरवरी में सेबी के पास दाखिल किए गए थे, जब सरकार ने कहा था कि वह राज्य द्वारा संचालित बीमाकर्ता कंपनी में अपनी 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री में 31.6 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रही है। हालाँकि, आईपीओ योजना को तब स्थगित कर दिया गया था। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद बाजार को अस्थिरता का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते एलआईसी का आईपीओ टाल दिया गया था। बता देंं कि आईपीओ बाजार से पूंजी जुटाने के लिए किसी कंपनी द्वारा लाया जाता है। यह एक प्राइवेट कंपनी को पब्लिक कंपनी में बदलने की प्रोसेस है। जब कंपनियों को पैसे की जरूरत होती है तो ये शेयर बाजार में खुद को लिस्ट कराती हैं।
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