देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम का इनिशियल पब्लिक आफरिंग यानी आईपीओ 4 मई को आएगा और 9 मई को बंद होगा।
नई दिल्ली, अप्रैल 26। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम का इनिशियल पब्लिक आफरिंग यानी आईपीओ 4 मई को आएगा और 9 मई को बंद होगा। मिली जानकारी के मुताबिक, एलआईसी आईपीओ के जरिये सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में अपनी 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इससे सरकार को 21,000 करोड़ रुपये मिलेंगे।

आईपीओ के आधार पर एलआईसी का मूल्यांकन छह लाख करोड़ रुपये बैठता है। सरकार ने फरवरी में एलआईसी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी या 31.6 करोड़ शेयर बेचने की योजना बनाई थी। इस बारे में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दस्तावेज जमा कराए गए थे। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से बाजार में जो उतार-चढ़ाव आया उससे आईपीओ योजना में भी अड़चनें आई। पिछले सप्ताह सरकार ने निर्गम का आकार घटाकर 3.5 प्रतिशत करने का फैसला किया था। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने सेबी के पास पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के नियम से छूट के लिए भी दस्तावेज दिए थे।
जानिए क्या है सेबी के नियम
सेबी के नियमों के अनुसार, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के मूल्यांकन वाली कंपनियों को आईपीओ में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय मूल्यांकक कंपनी मिलीमैन एडवाइजर्स ने 30 सितंबर, 2021 को एलआईसी का 5.4 लाख करोड़ रुपये का अंतर्निहित मूल्य निकाला था। निवेशकों से मिले ब्योरे के अनुसार, एलआईसी का बाजार मूल्य उसके अंतर्निहित मूल्य का 1.1 गुना यानी करीब छह लाख करोड़ रुपये बैठता है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें एलआईसी के आईपीओ का बड़ा योगदान होगा।
फरवरी में ड्राफ्ट हुए थे पेपर
सरकार ने फरवरी में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास एलआईसी के ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। जिसका लक्ष्य 12 ट्रिलियन रुपये के बाजार मूल्य पर लगभग 65,000 करोड़ रुपये जुटाना था। क्योंकि यह अपनी 5 प्रतिशत हिस्सेदारी को कम करता है। यहां तक कि 21,000 करोड़ रुपये का आईपीओ अब तक का सबसे बड़ा होगा और पेटीएम द्वारा 18,300 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को पार कर जाएगा।


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