नयी दिल्ली। कोरोनावायरस ने शेयर बाजार को तगड़ा झटका दिया है। शेयर बाजार में गिरावट का एलआईसी पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। शेयर बाजार ने एलआईसी को तगड़ा झटका दिया है। देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के इक्विटी पोर्टफोलियो में इस साल अब तक 1.84 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है। दरअसल कोरोनावायरस से वैश्विक के साथ-साथ घरेलू आर्थिक विकास को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। इस चिंता के कारण 20 मार्च तक 2020 में बीएसई और एनएसई 25 फीसदी से अधिक लुढ़क गए हैं। शेयर बाजार में मची इसी अफरा-तफरी में एलआईसी के पास मौजूद 94 फीसदी शेयरों के मूल्य में गिरावट आई है।
किन शेयरों ने डुबाया एलआईसी का पैसा
इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कैपिटल और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज में इस साल सबसे ज्यादा 70 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसके अलावा रिलायंस होम फाइनेंस में 66 फीसदी, रिलायंस पावर में 66 फीसदी और टाटा केमिकल्स में भी 66 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे एलआईसी को काफी नुकसान हुआ है। एलआईसी की शेयर पूंजी 31 दिसंबर को 6.04 लाख करोड़ रुपये थी, जो 20 मार्च तक 30.46 फीसदी लुढ़क कर 4.20 करोड़ रुपये रह गई है। स्टॉक एक्सचेंजों के पास उपलब्ध एलआईसी के शेयरों में ताजा होल्डिंग्स डेटा के आधार पर इसके कुल मूल्य की गणना की गई है।
इन सेक्टरों ने एलआईसी का सबसे अधिक पैसा डुबाया
जानकारी के लिए बता दें कि एलआईसी की पूंजी जिन सेक्टरों में सबसे अधिक डूबी है उनमें बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) और बीमा कंपनियां शामिल हैं। इन तीन सेक्टरों ने एलआईसी के 56,810 करोड़ रुपये डुबाये हैं। यानी कुल नुकसान में से 30 फीसदी इन तीन सेक्टरों की भेंट चढ़ा। इसके अलावा ऑयल एंड गैस (36,020 करोड़ रुपये), सिगरेट निर्माता (17,374 करोड़ रुपये), सूचना प्रौद्योगिकी (15,826 करोड़ रुपये), मेटल (12,045 करोड़ रुपये), ऑटोमोबाइल (11,329 करोड़ रुपये) और इन्फ्रास्ट्रक्चर (10,669 करोड़ रुपये) ने एलआईसी को 10000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान करवाया है।
कोरोना ने बिगाड़ी बाजार की चाल
कोरोनावायरस के कारण शेयर बाजार में हुई भारी बिकवाली की जानकारों को उम्मीद नहीं थी। हालात ये हो गए हैं कि बाजार में लोअर सर्किट तक लगा है। भारतीय बाजार में 2008 की मंदी के बाद पहली बार इस तरह की बिकवाली देखी गयी है। इस गिरावट के दौरान निफ्टी कई सालों के निचले स्तर तक गिरा है। शेयर बाजार में गिरावट सभी सेक्टरों में आई है यानी बिकवाली भी सभी सेक्टरों में हुई है। अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड में गिरावट वैश्विक वित्तीय और आर्थिक जोखिम में वृद्धि का संकेत है, जो भारतीय बैंकों के लिए सबसे अधिक चिंता का विषय हो सकता है।


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