LAVA : भारत के लिए चीन को दिखाया ठेंगा, करेगी सैंकड़ों करोड़ रु का निवेश

नयी दिल्ली। हाल के दिनों में कई विदेशी कंपनियों के चीन से निकल कर भारत आने की संभावनाएं बनी हैं। केंद्र सरकार ने चीन से भारत आने वाली कंपनियों के सामने खास ऑफर भी पेश किए हैं और विशेष रणनीति भी बनाई है। इन्हीं में एक नया है लावा इंटरनेशल। लावा इंटरनेशनल एक भारतीय बहुराष्ट्रीय मोबाइल हैंडसेट कंपनी है, मगर इसका कुछ ऑपरेशन चीन में भी होता है। कंपनी अपने चीन के ऑपरेशन को भारत लाएगी। लावा ने सरकार की तरफ से की गई पॉलिसी घोषणाओं के तहत अपना चीन का कारोबार भारत लाने का फैसला किया है। कंपनी की योजना अगले पांच वर्षों में देश में अपने मोबाइल फोन डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग कारोबार को बढ़ाने के लिए 800 करोड़ रुपये का निवेश करने की है।

अब भारत से करेगी निर्यात

अब भारत से करेगी निर्यात

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लावा इंटरनेशनल के चेयरमैन और मैनैजिंग डायरेक्टर हरी ओम राय का कहना है कि हमारे चीन में प्रोडक्ट डिजाइन के लिए 600-650 कर्मचारी हैं। अब हमने डिजाइनिंग को भारत शिफ्ट कर दिया है। भारत के लिए हमारी सेल्स आवश्यकताओं को लोकल प्लांट से पूरा किया गया। लावा चीन से कुछ मोबाइल निर्यात करती रही है, जो अब भारत से किए जाएंगे। लॉकडाउन अवधि के दौरान लावा ने चीन से अपनी निर्यात मांग पूरी की। राय कहते हैं कि मेरा सपना है कि चीन को मोबाइल फोन निर्यात किए जाएं। कुछ मोबाइल कंपनियां पहले से ही चीन को मोबाइल फोन निर्यात कर रही हैं।

सरकार का 48000 करोड़ रु का पैकेज

सरकार का 48000 करोड़ रु का पैकेज

अप्रैल में सरकार ने स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 48,000 करोड़ रुपये की तीन प्रोत्साहन योजनाओं का ऐलान किया था, जिससे 2025 तक 20 लाख डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार पैदा होंगे। इन योजनाओं में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) शामिल है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों को भारत में बनी वस्तुओं की बढ़ती बिक्री पर 4 - 6 प्रतिशत का प्रोत्साहन (Incentive) मिलेगा। इन्हीं योजनाओं को देखते हुए कंपनी अपने परिचालन को बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में भारत में 800 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही है।

भारत में बढ़ा मोबाइल का प्रोडक्शन

भारत में बढ़ा मोबाइल का प्रोडक्शन

देश में मोबाइल फोन का उत्पादन पिछले चार साल में आठ गुना तक बढ़ गया है। 2014-15 में 18,900 करोड़ रुपये से बढ़ कर ये 2019-20 में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है। घरेलू उत्पादन के माध्यम से देश की मांग लगभग पूरी तरह से फुल हो गई है। सरकार का अनुमान है कि पीएलआई योजना के जरिए मोबाइल फोन के लिए घरेलू मूल्य वृद्धि 20-25 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से 2025 तक बढ़कर 35-40 प्रतिशत हो जाएगी और इससे 8 लाख नौकरियां पैदा होंगी।

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