
RBI की दर-निर्धारण मौद्रिक नीति समिति ने आज ब्याज दरों को स्थिर रखा हैं। यह लगातार दूसरी बार हैं जब आरबीआई की तरफ से ब्याज की दरों को स्थिर रखा गया है।
आरबीआई वर्ष 2022 के फरवरी के महीने से ब्याज की दरों में बढ़ोतरी कर रहा है और आरबीआई ने रेपो रेट को 4 फीसदी से बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया है।
रिजर्व बैंक की तरफ से फिर से ब्याज की दरों को स्थिर रखने के साथ जानकारो का यह मानना है कि ब्याज को दरें चरम पर है और इस वर्ष के आखिरी और आने वाले वर्ष की शुरुआत में इसमें गिरावट की संभावना है।
इस सीधा मतलब यह है कि अगर आप आने वाले वर्ष में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश करते है, तो फिर यह संभावना है कि आपको कम ब्याज की दर मिलेगी क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने दरों में कटौती शुरू कर दी होगी।
यह फिर से इस तथ्य पर आधारित एक धारणा है कि मुद्रास्फीति की दर गिर रही है। मुद्रास्फीति की दर जब भी गिरती है, तो आरबीआई की तरफ से ब्याज की दरों में कटौती की जाती है, जिस वजह से विकास को बढ़ावा मिलता है।
कुछ बैंकों ने तो उधार दरों और जमा दरों में मामूली कटौती शुरू कर दी है। एक महीने के एमसीएलआर को आईसीआईसीआई बैंक ने 8.50 फीसदी से घटाकर 8.35 फीसदी कर दिया है। वही, इसने तीन महीने के एमसीएलआर को 8.55 फीसदी से घटाकर 8.40 फीसदी कर दिया है।
बैंक ने एमसीएलआर को छह महीने के कार्यकाल पर 5 बीपीएस बढ़ाकर 8.75 फीसदी और एक साल के कार्यकाल पर 5 बीपीएस बढ़ाकर 8.85 फीसदी कर दिया है।
पहले ही ऐक्सिस बैंक अपनी एफडी की कुछ अवधि की ब्याज दरों में कटौती कर चुका है। पंजाब नेशनल बैंक ने भी ऐसा ही कुछ किया है। शायद यह जो तथ्य है यह तथ्य संकेत देता है कि एफडी पर ब्याज की दरें अब चरम पर हो सकती हैं और यहां से यह केवल कम हो सकती है।
इसलिए जानकार निवेशकों को 3 से 5 साल के वक्त के लिये एफडी में निवेश की सलाह देते हैं। क्योंकि जैसे ही ब्याज दरें गिरती हैं, लेकिन आपका जो पैसा हैं। वो पैसे पहले ही उच्च दरों पर लॉक कर लिया होगा। जिससे आप ब्याज की दरों की गिरावट से खुद को सुरक्षित कर लेते हैं।


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