Success Story: आज हम आपको जिस व्यक्ति की सफलता की कहानी बताने जा रहे है उसका नाम मुरली डिवी है। वे डिवीज लैब के फाउंडर है। मुरली डिवी केवल 500 रु लेकर अमेरिका पहुंचे थे और आज वे लगभग 1 लाख करोड़ रु की कंपनी के मालिक है तो फिर आइए जानते हैं इनकी सफलता की कहानी के बारे में।
मुरली आंध्र प्रदेश के एक छोटे से शहर से ताल्लुक रखते हैं। मुरली का बचपन आर्थिक तंगी में गुजरा था। क्योंकि मुरली के पिता एक साधारण कर्मचारी थे। उनके पिता अपनी साधारण सा वेतन में अपने परिवार के 14 लोगों का भरन पोषण करते थे।

12वीं कक्षा में मुरली फेल हो गए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वे अपने फ्यूचर को बेहतर बनाने के लिए दिन रात मेहनत करते रहे। वर्ष 1976 में महज 25 वर्ष की आयु में मुरली डिवी अमेरिका चले गए।
यहां उन्होंने फार्मासिस्ट के तौर पर कार्य करना शुरू किया। फोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस वक्त मुरली देवी अमेरिका रवाना हुए थे तब उनके हाथ में सिर्फ 500 रु थे।
उन्होंने अमेरिका में नोकरी करके हर वर्ष करीब 54 लाख रु की कमाई की। मुरली डिवी ने इस दौरान कई कंपनियों के साथ कार्य किया। उन्हें पहली नौकरी में 250 रु मिले।
उन्होंने वह कुछ साल तक कार्य किया इसके बाद उन्होंने भारत वापस आने का निर्णय किया। उनके पास उस समय 33 लाख रु थे। वे देश वापस लौट आए लेकिन उन्होंने यह तय नहीं किया कि उन्हें क्या करना है।
मुरली डिवी ने वर्ष 1984 में कल्लम अंजी रेड्डी से हाथ मिलाया, जिसका वर्ष 2000 में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ विलय कर दिया गया। इस दौरान डॉ. रेड्डीज लैब्स में 6 साल तक काम करने के बाद उन्होंने मुरली डिवी ने वर्ष 1990 में डिवीज लैबोरेटरीज लॉन्च की।
उन्होंने दवाओं के निर्माण में उपयोग होने वाले एपीआई का बिजनेस शुरू किया। मुरली डिवी ने वर्ष 1995 में अपनी पहली मैन्युफक्चरिंग यूनिट चौटुप्पल, तेलंगाना में स्थापित की। वही, उन्होंने वर्ष 2002 में विशाखापत्तनम के पास कंपनी की दूसरी यूनिट शुरू की।
डिविज लैब्स फार्मा सेक्टर में आज एपीआई बनाने वाली टॉप तीन कंपनियों में से एक है और इस कंपनी का मार्केट पूंजीकरण करीब 1 लाख करोड़ रु है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2022 में डिवीज लैबोरेट्रीज ने 88 बिलियन रुपये का राजस्व दर्ज किया।


Click it and Unblock the Notifications