
RBI ने मौद्रिक नीति समिति की 2 दिन तक चली बैठक के बाद गुरुवार को इसमें लिए गए फैसले के ऐलान किया है।आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की तरफ से बताया गया है कि मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया है। आइए जानते हैं इस बैठक के बाद गवर्नर की घोषणाओं पर जानकारों की क्या राय है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार के मुताबिक, रेपो रेट पर मौद्रिक नीति समिति का फैसला और रुख समायोजन की वापसी के रूप में अपेक्षा के अनुरुप आया है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास की टिप्पणी को सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है।आरबीआई का फाइनेंशियल ईयर 2024 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 फीसदी पर आ गया है, जो पिछली बैठक में अनुमानित 5.2 फीसदी से कम है।
एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट अभीक बरुआ ने कहा है कि आरबीआई ने नीतिगत दर और रुख दोनों को अपरिवर्तित रखते हुए इस बार मौद्रिक नीति समिति की बैठक में यथास्थिति बनाए रखा है।
अभीक बरुआ ने कहा है कि पहली तिमाही में केंद्रीय बैंक ने वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित करके 8 फीसदी कर दिया है, जबकि अपना जो सालाना पूर्वानुमान है। इसको 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा है, जो हमारे 6 - 6.2 फीसदी के अनुमान से ज्यादा है।
प्रोफेक्टस कैपिटल लिमिटेड के केवी श्रीनिवासन की तरफ से कहा गया है कि रिजर्व बैंक का रेपो रेट को होल्ड रखना वृद्धि में तेजी का संकेत है। उन्होंने कहा चौथी तिमाही में अप्रत्याशित रूप से तेज जीडीपी वृद्धि और ब्याज दर में स्थिरता पूंजीगत व्यय चक्र में गति लाएगा।
श्रीराम फाइनेंस के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी पराग शर्मा की तरफ से कहा गया है कि पिछले 2 सालों में केन्द्रीय बैंक के उपायों और इंडियन इकोनॉमी के लचीलेपन के परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति को रोकने में देश को प्रेरणादायक सफलता मिली है।


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