Problem of low cost airlines: लो कॉस्ट कैरियर यानी कम कीमत वाले एयरलाइंस की वजह से पिछले कुछ दशकों से विमानन उद्योग में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा गया है। इन्होंने हवाई यात्रा की लोगों तक पहुंच को नए सिरे परिभाषित किया है। हालांकि, जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण यह क्षेत्र इस समय कड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। एक केस स्टडी में पता चलता है कि कैसे लो कॉस् एयरलाइन आर्थिक दबाव के बीच भी चल रही हैं। इससे पता चलता है कि कौन सी रणनीति और बदलाव के तहत ये एयरलाइन अस्थिर बाजार के साथ भी आगे बढ़ पा रही हैं।
लगातार बढ़ती ईंधन की कीमतों के बाद भी लो कॉस्ट एयरलाइन का बचे रहना सिर्फ संयोग नहीं है। यह है समय के हिसाब से किए गए सही रणनीतिक उपाय और फैसलों का परिणाम है। विमान कंपनियों ने ईंधन लागत के प्रभाव को कम करने के लिए कई तरह के कदम उठाए हैं। फ्लाइट रूट को ज्यादा बेहतर और अनुकूल बनाकर, ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाकर और डायनेमिक फेयर प्राइसिंग जैसी रणनीति का इस्तेमाल करके लो कॉस्ट एयरलाइन ने मार्केट में कंपटीशन बरकरार रखा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपनी वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए सामान शुल्क (बैगेज फीस) और इन-फ़्लाइट सेवाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

जेट ईंधन की कीमत में बढ़ोरी से बचने के लिए कम लागत वाली एयरलाइनों द्वारा अपनाई गई प्रमुख रणनीतियों में से एक उनके बेड़े का आधुनिकीकरण भी है। ज्यादा बेहतर और नए कम ईंधन की खपत करने वाले एयर क्राफ्ट खरीदकर इन एयरलाइंस ने पर सीट-किलोमीटर के हिसाब से ईंधन की खपत को काफी कम कर लिया है। इसके अलावा, अन्य वाहकों के साथ रणनीतिक साझेदारी और कोड-शेयरिंग समझौतों ने भी इन एयरलाइनों को अपने नेटवर्क को बढ़ाे में मदद की है। इससे लोगों को बिना ज्यादा किराया दिए कई विकल्प मिल जाते हैं।
सरकार ने भी टैक्स में छूट देकर,सब्सिडी से और पॉलिसी सपोर्ट से लो कॉस्ट एयरलाइंस को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। बदले हुए कंज्यूमर बिहेवियर की वजह से भी कम कीमत वाले यात्रा के विकल्प में काफी बढ़ोतरी हुई है। क्योंकि लोग लग्जरी से ज्यादा टिकट की कीमतों का ध्यान देते हैं। भारत के लोगों की प्राथमिकता अक्सर अक्सर काम कॉस्ट वाली एयरलाइन होती है, जिसकी वजह से लो कॉस्ट एयरलाइन को बेहतर कंज्यूमर बेस मिला है, जिससे विपरीत आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद यह इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है।
भारतीय लो कॉस्ट एयरलाइंस ने बढ़ती जेट ईंधन की कीमतों के बावजूद जबरदस्त लचीलापन दिखाया है और खुदपर इसका कुछ खास फर्क नहीं पड़ने दिया है। इनोवेशन, कम कीमत में परिचान, सरकार से मिलने वाली सहायता और उपभोक्ता की बदलती हुई प्राथमिकता के बीच न सिर्फ ये विमानन कंपनियां टिकी हुई हैं, बल्कि भविष्य में भी इनकी ग्रोथ जबरदस्त रहेगी। जैसे-जैसे ये उद्योग विकसित हो रहा है, उनके टिके रहने की केस स्टडी भारत के विमानन बाजार में कम लागत वाले व्यवसाय मॉडल के बारे ज्यादा बेहतर बताएगी।
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