Success Story: आज हम आपको जिस व्यक्ति की सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं उसका नाम विकास डी नाहर हैं। वे हैपिलो के को-फाउंडर और सीईओ हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने लगभग बीस बिजनेस आइडिया पर कार्य किया और उनका हर दांव विफल होता रहा। हजारों को सफलता मिलती हैं लेकिन विकास डी नाहर की कहानी इसलिए बेहद खास है कि कई बार असफल होने के बाद उनका हौसला जरा भी कम नहीं हुआ।
आखिरकार उनके संघर्ष ने रंग दिखाया और केवल 10,000 रु की पूंजी लगाकर उन्होंने कारोबार को शुरू किया और सफल बिजनेस को बड़े कारोबार में बदल दिया। आज उनकी कंपनी हैपिलो लगभग 500 करोड़ रु का कारोबार कर रही है।

विकास डी नाहर जो हैपिलो के को-फाउंडर और सीईओ हैं उन्हें शुरू से ही खुद पर भरोसा था। यह वजह है कि निरंतर 20 बार फैल होने के बाद उन्होंने कारोबार करने की जिद नहीं छोड़ी और ड्राई फ्रूट की कंपनी हैपिलो बनाई, जिसमें केवल 10,000 रु का निवेश करके करोड़ों की कंपनी बना दी।
फैमिली से मिला कारोबार का जज्बा
उन्हें कारोबार करने का जज्बा अपने परिवार से ही मिल, क्योंकि विकास वे एक किसान परिवार से आते हैं जो कॉफी और काली मिर्च का कारोबार करता था।
उन्होंने साल 2005 में बैंगलोर विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद जैन ग्रुप में बतौर सीनियर इम्पोर्ट मैनेजर काम किया। फिर उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने सिम्बॉयोसिस यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की और सात्विक स्पेशियलिटी फूड में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर काम किया।
उन्हें यह से मिला अनुभव काफी काम आया और फिर इन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपना काम शुरू किया। उनकी सफलता ने ही उन्हें शार्क टैंक सीजन 2 में जज भी बना दिया।
केवल 2 कर्मचारियों से शुरू की कंपनी
साल 2016 में विकास ने केवल 10,000 रु निवेश करके हैपिलो को शुरू किया था। उनके पास उस समय केवल दो कर्मचारी थे और ड्राई फ्रूट को इस कंपनी ने ऑनलाइन बेचना शुरू किया। पूरा जोर क्वालिटी पर रहता था।
जिस वजह से उनके प्रोडक्ट को बेहद ही जल्द ही ग्राहकों ने हाथों हाथ ले लिया। यह कंपनी अभी फ्लिपकार्ट, अमेजन सहित तमाम ई-कॉमर्स साइट पर अपने प्रोडक्ट की बिक्री करती है। मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, अभी उसके प्रोडक्ट की रेंज भी बढ़ कर 40 तरह के ड्राई फ्रूट तक पहुंच गई है।
इसके साथ ही इस ब्रांड से 60 तरह के मसाले और 100 तरह के चॉकलेट भी मिल रहे हैं। सिर्फ कुछ ही वर्षो में कंपनी लगभग 500 करोड़ रु का मार्केट वैल्यूएशन पार कर गई है। हालांकि, इससे पहले विकास ने तकनीक और फाइनेंस सहित लगभग 20 आइडिया पर काम किया, जहां केवल असफलता हाथ लगी।
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