होली : जानिए इस बार किस रेट पर मिल रही गुझिया

होली का त्‍योहार जल्‍द ही नजदीक आ रहा है। और तो बाजार में गुझिया की भीनी खुशबू अहसास करा रही है। एक ओर लोग जहां रंगों के इस त्योहार की तैयारी में जुटे हैं, वहीं घर में बनने वाले पकवानों की खरीदारी भी

नई द‍िल्‍ली: होली का त्‍योहार जल्‍द ही नजदीक आ रहा है। और तो बाजार में गुझिया की भीनी खुशबू अहसास करा रही है। एक ओर लोग जहां रंगों के इस त्योहार की तैयारी में जुटे हैं, वहीं घर में बनने वाले पकवानों की खरीदारी भी जोरों पर है। ऐसे में यदि गुझिया न हो तो होली का रंग फीका हो जाता है। बाजार में इन दिनों कई किस्म की गुझिया बिक रही है। ये बात भी सच है क‍ि पहले की तरह अब गुझिया बनाने के लिए घर-घर महिलाओं की महफिल नहीं सजती। कई तरह की गुझिया मार्केट में मिल रही है ज‍िसमें सबसे ज्‍यादा खोवा वाली गुझिया की मांग होती है, क्‍योंक‍ि यह वैसी ही होती है जैसी घरों में बनती है। समय न होने की वजह से लोग इन्‍हें अब दुकानों से खरीद रहे है।

Know At What Rate Gujhiya Is Getting In Holi This Time

गुझिया के दामों में भी उछाल
ग्राहकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शहर में मिठाई कारोबारियों ने भी पूरी तैयारी कर रखी है। बड़े पैमाने पर गुझिया तैयार की है। कारोबार‍ियों को लगातार ऑर्डर भी मिल रहा है। बाजार में गुझिया के दामों में भी उछाल है। 220 रुपये से शुरू होकर 480 रुपये प्रति किलो की दर से अलग-अलग प्रकार की गुझिया बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध है। देसी और सूजी गुझियों की मांग अधिक रहती है। होली के लिए मिठाई कारोबारियों ने सूजी, मेठा, केसर समेत पाग की गुझिया बना रखी है। श्यामगंज में मिठाई विक्रेता के अनुसार उनके यहां पाग की गुझिया 400 रुपये प्रति किलो, केस की गुझिया 480 रुपये प्रति किलो है। सभी गुझिया देसी घी से निर्मित है। जबकि पास की दूसरी दुकान में सादी गुझिया 220 रुपये प्रति किलो और मावा की गुझिया 240 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध है। सूजी व देसी गुझियों की मांग अधिक है।

गुझिया की कीमत प्रतिक‍िलों में जानिए यहां
खोवा गुझिया -540
चाशनी गुझिया -540
केसर गुझिया -1600
काजू गुझिया -1400
चाकलेट गुझिया -1500
मेवा गुझिया -1200

अब बदल गया ट्रेंड
पहले घरों में होली को लेकर एक माह पहले से तैयारी चलने लगती थी। पापड़, चिप्स घरों की छतों पर सूखते नजर आते थे। वहीं आस पड़ोस की महिलाओं से गुझिया बनवाने के लिए संपर्क किया जाता था, लेकिन बदलते समय में ट्रेंड भी बदल गया है। नये जमाने के लोग इसे बड़ा झंझट समझते हैं। इसके लिए गुझिया अगर बनती भी है, तो महज शगुन के तौर पर दो चार गुझिया। वरना अब ज्‍यादातर लोगों को तो बाजार से रेडीमेट गुझिया खरीदते देखा जा रहा है।

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