New Sebi Rules: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल ही में रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट को रेग्युलेट करने करने वाले नियमों में बदलाव को मान्यता देदी है। गौरतलब है कि बाजार नियामक ने 2015 में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट के लिए नियम बनाए थे जिनमें अब बदलाव किया गया है। इस कदम का उदेश्य स्मॉल और मीडियम (आरईआईटी) के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना होता है, जिससे निवशकों के रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट करना काफी ज्यादाआसान हो जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि मार्केट रेगुलेटर के इस कदम से रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा।
आपको बताते चलें कि इन बदलावों के तहत ट्रस्टों के लिए जरूरी मिनिमम ऐसेट वैल्यू को भी 10 गुना तक घटा दिया गया है। यह मिनिमम ऐसेट वैल्यू पहले 500 करोड़ रुपये थी, जो अब घटकर 50 करोड़ रह गई है।

क्या है आरईआईटी
आरईआईटी का फुलफर्म रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट होता है। ये ऐसी कंपनियां होती हैं, जो इनकम पैदा करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों का संचालन करने के साथ-साथ उन्हें फाइनेंस भी करती हैं। गौरतलब है कि इन एसेट्स पर ट्रस्ट का मालिकाना हक भी होता है। इनमें ऑफिस और मॉल जैसे बड़े और रिटेल स्पेस शामिल हो सकते हैं। इसके जरिए कोई भी बिना पूरी बिल्डिंग खरीदे रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करने के एक तरीके की तरह इस्तेमाल कर सकता है।
आसान भाषा में समझे क्या है आरईआईटी
अगर हम आपको इसे आसान शब्दों में बताएं तो कई लोग रियल एस्टेट प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन वह ऐसा इसलिए नहीं कर पाते हैं, क्योंकि इसके लिए एक बड़ी रकम की जरूरत होती है। हालांकि रियल एस्टेट में सोचा समझा निवेश आपको जबरदस्त प्रॉफिट भी दे सकता है। तो आप रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट के जरिए होटल, अपार्टमेंट, ऑफिस और मॉल जैसी प्रॉपर्टी में अपने पैसे लगा सकते हैं। यह ठीक उसी तरह है जैसे म्युचुअल फंड की कोई स्कीम कई निवेशकों से पैसे जुटाकर शेयर या बॉन्ड में इन्वेस्ट करती है, वैसे ही आरईआईटी निवेशकों का पैसा जुटाकर रियल एस्टेट प्रॉपर्टी में निवेश करता है।
आपको बताते चलें कि पूरे देश में सिर्फ 3 रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट मौजूद हैं। इनमें एंबेसी ऑफिस पार्क आरईआईटी, माइंडस्पेस बिजनेस पार्क आरईआईटी और ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट शामिल है। कुछ विशेषज्ञ बाजार नियामक के इस रूल को गेम चेंजर की तरह देख रहे हैं, जो मार्केट में जबरदस्त बदलाव ले आ सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने टोकन देने के फायदे के बारे में भी बताया है। उन्होंने बताया कि रियल एस्टेट संपत्ति को खरीदना हमेशा एक चुनौती से भरा हुआ काम होता है और उनके ज्यादा मूल्य के कारण बेचना भी काफी मुश्किल हो जाता है। टोकेनाइजेशन की मदद से बाइट का साइज काफी हद तक छोटा हो जाता है, जिस वजह से लेन देन करना काफी ज्यादा आसान हो जाता है।
ऐसे में जैसे-जैसे बाइट का साइज घटता है, वैसे ही यह ट्रस्ट इन एसेट्स के लिए एक बेहतर सेकेंडरी मार्केट के बारे में सोच सकते हैं। इस फैसले से लोग ऑफिस के लिए और रहने के लिए रियल एस्टेट का हिस्सा बड़ी आसानी से खरीद सकते हैं। हालांकि इस पर किए गए टैक्सेशन को और ज्यादा क्लियर करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स या अल्ट्रा एचएनआई तक ही सीमित रखा गया है, क्योंकि प्रॉपर्टी की वैल्यू 50 करोड़ से 1000 करोड़ रुपए तक है। ऐसे में मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने न्यूनतम संपत्ति की सीमा को काफी कम कर दिया है। इतना ही नहीं मिनिमम टिकट साइज को भी सिर्फ 10 लाख रुपए रखने का भी प्रस्ताव रखा है।


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